
*गंगा अवतरण*
लेखक:नेहा कुमारी (खुशी) शोधार्थी
जम्मू विश्वविद्यालय, जम्मू
हिमालय की गोद से उतरी,
ममता बनकर बहती हो माँ।
हर पाप हर लेती पल में,
जीवन में उजियारा भरती हो माँ।।
एक ओर गंगा माँ की निर्मलता,
एक ओर शिव का वैराग्य महान,
इन दोनों की कृपा से खिल उठता,
सूना पड़ा हर एक इंसान।।
तेरी धारा में शांति मिलती,
भोले की भक्ति में संसार,
जब “हर हर महादेव” गूंजे,
मिट जाते मन के सब अंधकार।।
गंगा दशहरा का पावन दिन,
ले आए जीवन में नया सवेरा,
माँ गंगे का आशीष मिले,
और भोले बाबा का प्रेम घनेरा।।
मेरे भाव में बस इतनी प्रार्थना
ना धन चाहूँ, ना कोई ताज,
बस गंगा सा निर्मल मन मिले,
और शिव चरणों में रहे मेरा राज।।
हर हर गंगे… हर हर महादेव…।
