
हरि न्यूज
हरिद्वार। सनातन धर्म की आध्यात्मिक राजधानी हरिद्वार में ईसाई परम्परा “केक काटकर” जन्मदिन मनाने की परम्परा को मठ मंदिर आश्रम में बढ़ावा मिल रहा है।ईसाई मशीनरी की परम्परा को सनातन धर्म संस्कृति को संरक्षित संवर्धित संरक्षण करने वाले बढ़वा देते नजर आ रहे हैं। तीर्थ नगरी हरिद्वार में इन दिनों एक नई परंपरा को लेकर बहस तेज हो गई है। सनातन धर्म संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का दायित्व निभाने वाले संत,महंत और महामंडलेश्वर अब पारंपरिक तरीके से हटकर जन्मदिन के अवसर पर केक काटते नजर आ रहे हैं। इस बदलते स्वरूप को लेकर धार्मिक और सामाजिक वर्गों में चर्चा का माहौल है।
धार्मिक जानकारों का मानना है कि भारतीय संस्कृति में जन्मोत्सव मनाने की अपनी विशिष्ट परंपराएं रही हैं—हवन, पूजन, भंडारा और सत्संग। लेकिन अब इनकी जगह आधुनिक और पश्चिमी शैली के आयोजन लेते जा रहे हैं। कई लोग इसे समय के साथ बदलाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक मानते हैं, तो वहीं एक वर्ग इसे सनातन परंपराओं से दूरी के रूप में देख रहा है।
कुछ संतों का कहना है कि केक काटना केवल एक सामाजिक प्रतीक है, जिसका धर्म से कोई सीधा संबंध नहीं है। उनका तर्क है कि यदि इससे समाज में खुशी और जुड़ाव बढ़ता है, तो इसे अपनाने में कोई बुराई नहीं है। वहीं दूसरी ओर परंपरावादी विचारधारा से जुड़े लोग इसे ‘संस्कृति पर बाहरी प्रभाव’ बताते हुए चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि धीरे-धीरे सनातन धर्म संस्कृति की मूल परंपराएं कमजोर हो रही हैं।
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल केक काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक सांस्कृतिक परिवर्तन का संकेत है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सनातन धर्म अपनी मूल परंपराओं को संरक्षित रखते हुए आधुनिकता के साथ संतुलन बना पाएगा?
फिलहाल, हरिद्वार में यह विषय बहस और चिंतन का केंद्र बना हुआ है। आने वाले समय में समाज किस दिशा में आगे बढ़ेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा परंतु सनातन धर्म संस्कृति को समर्पित लोगों को इस और अपना विशेष ध्यान आकर्षित करना होगा।
