
हे माँ महाकाली, अवतार धरो
सुना है मैंने कलियुग में
लेंगे कल्कि अवतार प्रभु,
करेंगे सबका उद्धार,
होगा कलियुग का संहार।
पर ऐसे कब तक
हम जीवित मारे जाएँगे?
हम चुप बैठे रहे तो ये हैवान
हर रोज़ एक-एक स्त्री को
नोंच-नोंच कर खाएँगे।
अब बहुत हुआ, बस बहुत हुआ।
जब होगा कलियुग का अंत,
तब लेंगे कल्कि अवतार प्रभु।
पर उससे पहले,
हे माँ महाकाली!
आप यहाँ अवतार धरो।
एक बार फिर से
भले ही सबका विनाश करो,
पर माँ महाकाली, अवतार धरो।
संहार करो, संहार करो,
इन हैवानों का संहार करो।
हे महाकाली, अवतार धरो।
कर दो इन राक्षसों का सर्वनाश, माँ,
हम स्त्रियों का उद्धार करो।
अब बहुत हुआ अत्याचार,
हे माँ, अब फिर से अवतार धरो।
सुन लो, माँ काली, मेरी पुकार।
स्त्रियों को नोंच खाने वाले
हर हैवान के मुण्डों से
अपना श्रृंगार करो।
रक्त बहा कर इनका भी आप रक्त स्नान करो”
उनके पापों का अंत कर,
धर्म और न्याय का विस्तार करो।
संहार करो, संहार करो,
इन हैवानों का संहार करो।
हे माँ महाकाली, अब तो अवतार धरो।।
— लेखिका जूही अग्रहरी
