
लेखिका — जूही अग्रहरी
जिंदगी
जिंदगी कभी धूप सी तपती है,
तो कभी ठंडी छांव बन जाती है।
कभी हंसाती है खुलकर,
तो कभी खामोशियों में रुला जाती है।
ये जिंदगी भी कितनी अजीब है ना,
हर दिन एक नया रंग दिखाती है।
किसी को अपनों की भीड़ देती है,
तो किसी को तन्हाई का संसार।
कभी मन में हजारों सपने जगाती है,
तो कभी उन्हीं सपनों को तोड़ देती है।
फिर भी इंसान हर सुबह
एक नई उम्मीद लेकर उठता है।
जिंदगी एक बहती नदी की तरह है,
जो कभी नहीं रुकती।
रास्तों में कितने ही पत्थर क्यों ना आए,
वो अपना रास्ता बना ही लेती है।
कभी हम रिश्तों में उलझ जाते हैं,
कभी खुद से ही दूर हो जाते हैं।
भीड़ में रहकर भी
मन अकेलापन महसूस करता है।
कभी छोटी छोटी खुशियां
पूरा दिन सुंदर बना देती हैं।
मां का प्यार,
किसी अपने का साथ,
और अपनों की मुस्कान
जीवन को जीने का कारण दे जाती है।
जिंदगी केवल सांसों का नाम नहीं,
यह अनुभवों का सफर है।
जहां हर दर्द कुछ सिखाता है,
और हर ठोकर इंसान को मजबूत बनाती है।
कभी हार मिलती है,
तो कभी सफलता कदम चूमती है।
पर समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता,
बुरे दिन भी गुजर जाते हैं।
जिंदगी हमें धैर्य रखना सिखाती है,
टूटकर फिर से संभलना सिखाती है।
यह बताती है कि
अंधेरी रातों के बाद
सुबह जरूर आती है।
कुछ लोग जीवन में आते हैं
और हमेशा के लिए याद बन जाते हैं।
कुछ रिश्ते साथ चलकर भी छूट जाते हैं,
और कुछ दूर होकर भी दिल में बस जाते हैं।
जिंदगी का सबसे सुंदर सत्य यही है
कि यह कभी स्थिर नहीं रहती।
हर पल बदलती है,
हर दिन कुछ नया सिखाती है।
इसलिए जिंदगी को
बहुत ज्यादा उलझाकर नहीं जीना चाहिए।
छोटी छोटी खुशियों को महसूस करना चाहिए,
अपनों को समय देना चाहिए,
और हर पल को प्रेम से जीना चाहिए।
क्योंकि एक दिन
सब कुछ याद बन जाएगा,
बस रह जाएंगी
कुछ मुस्कानें, कुछ यादें
और जीए हुए पलों की कहानियां।।
