
*शारदीय नवरात्रि में मां भगवती के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व, भक्ति और साधना से मिलता है आत्मिक बल
हरि न्यूज
हरिद्वार। भारत माता मंदिर के महंत एवं निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धालु भक्तों को मां भगवती दुर्गा के नौ स्वरूपों की महिमा और धार्मिक महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मां नवदुर्गा की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। मां भगवती अपने भक्तों के संकटों का हरण करने वाली तथा उनका कल्याण करने वाली हैं।
महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने कहा कि शारदीय नवरात्रि सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु व्रत, जप, ध्यान, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से मां भगवती की आराधना करते हैं। नवरात्रि का प्रत्येक दिन मां के एक विशेष स्वरूप को समर्पित होता है, जो भक्तों को शक्ति, साहस, धैर्य, ज्ञान और सदाचार का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक नवदुर्गा के सभी स्वरूपों की अपनी विशेष महिमा है। मां के नौ स्वरूपों की उपासना मनुष्य को धर्म, सत्य और सद्कर्मों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। मां दुर्गा की आराधना केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संयम, सेवा और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराने का भी अवसर है।
स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने कहा कि नवरात्रि में श्रद्धालुओं को श्रद्धा और विश्वास के साथ मां भगवती की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही अपने आचरण में विनम्रता, करुणा, परोपकार और सद्भाव को स्थान देना चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना, असहाय लोगों की सेवा करना और सभी के प्रति सम्मान का भाव रखना भी सच्ची भक्ति का महत्वपूर्ण अंग है।
उन्होंने कहा कि मां भगवती दुर्गा की कृपा से भक्तों को कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने का संबल मिलता है। नवरात्रि का पर्व हमें बुराई पर अच्छाई की विजय, अधर्म पर धर्म की स्थापना और नारी शक्ति के सम्मान का संदेश देता है।
महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना के साथ-साथ सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण में भी अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि मां नवदुर्गा की भक्ति से प्रेरणा लेकर प्रत्येक व्यक्ति को समाज में प्रेम, शांति, एकता और सद्भाव को बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए।



