
*दिल्ली से उत्तराखंड लौटते समय समर्थकों और शुभचिंतकों ने जगह-जगह किया स्वागत, रामपुर तिराहा पहुंचकर शहीदों को किया नमन

हरि न्यूज
हरिद्वार। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत स्वस्थ होने के बाद दिल्ली से उत्तराखंड लौटे। उनके हरिद्वार और देहरादून पहुंचने के दौरान विभिन्न स्थानों पर समर्थकों एवं शुभचिंतकों की मौजूदगी देखने को मिली। तेज धूप के बावजूद बड़ी संख्या में लोग उनके स्वागत के लिए पहुंचे। इस दौरान समर्थकों का उत्साह राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा।
हरीश रावत दिल्ली से उत्तराखंड की ओर रवाना होने के बाद रामपुर शहीद स्मारक और रामपुर तिराहा, मुजफ्फरनगर पहुंचे। यहां उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अमर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया। उन्होंने शहीदों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। रामपुर तिराहा का यह पावन स्थल उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए किए गए संघर्ष, त्याग और बलिदान की याद दिलाता है। शहीदों की स्मृति और उनके सपनों को जीवंत रखना सभी का दायित्व है।
हरीश रावत के उत्तराखंड लौटने के दौरान रास्ते में समर्थकों और चाहने वालों की मौजूदगी ने उनके राजनीतिक प्रभाव और जनसंपर्क को एक बार फिर चर्चा में ला दिया। हरिद्वार से लेकर देहरादून तक उनके स्वागत के लिए कार्यकर्ताओं और समर्थकों का पहुंचना उनके प्रति लोगों के जुड़ाव के रूप में देखा गया।

पूर्व मुख्यमंत्री के इस दौरे को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, रावत की ओर से इस दौरान मुख्य रूप से उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों की स्मृति और प्रदेश के विकास से जुड़े विषयों पर ही अपनी बात रखी गई। उनके समर्थकों की सक्रियता के चलते कांग्रेस के राजनीतिक गलियारों में भी इस दौरे को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं।
लंबे राजनीतिक अनुभव वाले हरीश रावत की उत्तराखंड वापसी के दौरान समर्थकों की मौजूदगी ने यह जरूर दिखाया कि उनके साथ जुड़ा कार्यकर्ता और समर्थक वर्ग अब भी सक्रिय है। दिल्ली से उत्तराखंड तक उनके स्वागत का सिलसिला और रामपुर तिराहा पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने की पहल ने उनके दौरे को राजनीतिक एवं सामाजिक दोनों दृष्टि से चर्चा में ला दिया।
अब आने वाले दिनों में हरीश रावत की राजनीतिक गतिविधियां किस दिशा में आगे बढ़ती हैं, इस पर कांग्रेस संगठन के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति पर नजर रखने वालों की निगाहें टिकी रहेंगी।
