
हरि न्यूज
हरिद्वार। रेलवे स्टेशन ज्वालापुर स्थित श्री शिव वाटिकेश्वर मंदिर में सर्वजन कल्याण की कामना को लेकर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ कथा का श्रवण किया। कथा व्यास भागवताचार्य पंडित भगवान कृष्ण शास्त्री जी ने श्रीमद्भागवत के महात्म्य का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म और आध्यात्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
पंडित भगवान कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भागवत कथा के आयोजन से सनातन धर्म एवं संस्कृति का प्रचार-प्रसार होता है और समाज में धार्मिक एवं आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली तथा पितरों को मोक्ष एवं सद्गति प्रदान करने वाली कथा है। इसी कारण श्रीमद्भागवत को पंचम वेद एवं अमर ग्रंथ की संज्ञा दी गई है।

कथा के दौरान राजा परीक्षित एवं शुकदेव जी के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित ने शमिक मुनि का अपमान करते हुए उनके गले में मृत सर्प डाल दिया था। इससे क्रोधित होकर शमिक मुनि के पुत्र श्रृंगी ऋषि ने राजा परीक्षित को सात दिनों के भीतर तक्षक नाग के दंश से मृत्यु का श्राप दिया। जब राजा परीक्षित को श्राप का पता चला तो उन्होंने सांसारिक मोह त्यागकर गंगा तट पर शुकदेव जी से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। भागवत कथा के प्रभाव से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई।
उन्होंने कहा कि इसी धार्मिक प्रसंग के आधार पर सनातन परंपरा में पितरों की मोक्ष एवं सद्गति के लिए श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन की परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पितरों के निमित्त भागवत कथा का आयोजन करने से उन्हें सद्गति प्राप्त होती है तथा पितृ दोष से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

कथा के द्वितीय दिवस शरला देवी, शांति दर्गन, शारदा शर्मा, शंकर दत्त पोखरियाल, रेनू पोखरियाल, पंडित आदित्य जगूड़ी, पंडित सचिन पैन्यूली, पंडित शीतल प्रसाद उपाध्याय, अर्जुन पंडित, आशीष शर्मा सहित अनेक श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत का विधिवत पूजन किया और कथा का श्रवण कर धर्मलाभ अर्जित किया।

