
हरि न्यूज
हरिद्वार, 15 जुलाई। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं गंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ भाजपा नेता अशोक त्रिपाठी ने कहा कि उत्तराखंड में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति उत्तराखंडी है। ऐसे में पहाड़-मैदान, गढ़वाल-कुमाऊं जैसी क्षेत्रीय मानसिकता को बढ़ावा देना राज्यहित में नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए कार्य करना चाहिए।
प्रेस क्लब हरिद्वार में आयोजित पत्रकार वार्ता में अशोक त्रिपाठी ने कहा कि जिस उद्देश्य और भावना के साथ हरिद्वार को उत्तराखंड का हिस्सा बनाया गया था, वह पूरी तरह साकार नहीं हो सकी। उनका कहना था कि विकास की दृष्टि से हरिद्वार स्वयं को उपेक्षित महसूस करता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि हरिद्वार को उत्तराखंड में शामिल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लोगों के योगदान का अध्ययन किया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के दौरान प्रभावी भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी इस विषय में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।
अशोक त्रिपाठी ने कनखल स्थित ऐतिहासिक सतीकुंड सौंदर्यकरण परियोजना को लेकर भी कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की निर्धारित लागत अत्यधिक प्रतीत होती है और उनका मानना है कि यह कार्य इससे काफी कम लागत में भी गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यदायी संस्था ने सतीकुंड में जलप्रवाह की संभावना से इंकार किया है, जबकि धार्मिक दृष्टि से कुंड में आचमन, स्नान और जलनिकासी की समुचित व्यवस्था होना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर परियोजना की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पूरे मामले की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक की जाए तथा ऐसे कार्यों को राज्य की संस्थाओं और स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए।
पत्रकार वार्ता में उन्होंने हरिद्वार में प्रस्तावित कॉरिडोर परियोजना को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अब तक परियोजना का स्वरूप, दायरा और प्रभाव स्पष्ट नहीं किया गया है, जिससे स्थानीय लोगों और व्यापारियों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। सरकार को इस विषय पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि सभी आशंकाओं का समाधान हो सके।
आगामी वर्ष प्रस्तावित धार्मिक आयोजन का उल्लेख करते हुए अशोक त्रिपाठी ने कहा कि इसे परंपरागत धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप ही आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष आयोजित होने वाला पर्व अर्धकुंभ है और इसे उसी स्वरूप में प्रचारित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि गंगा सभा द्वारा प्रकाशित पंचांग और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में भी इसे अर्धकुंभ के रूप में ही अंकित किया गया है। धार्मिक परंपराओं और स्थापित मान्यताओं के अनुरूप ही आयोजन और प्रचार-प्रसार होना चाहिए।
