
श्री विश्नोई आश्रम भीमगोड़ा की परंपराओं को आगे बढ़ा रहे ब्रह्मलीन महंत स्वामी राजिन्द्रानन्द महाराज के कृपा पात्र शिष्य प्रणवानंद महाराज ,हिरणपुर गांव में हो रही हरि कथा

हरि न्यूज
हरिद्वार/बिजनौर।तीर्थनगरी हरिद्वार के उत्तरी क्षेत्र भीमगोड़ा स्थित प्रख्यात धार्मिक संस्था श्री विश्नोई आश्रम की आध्यात्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए संत समाज भगवान जम्भेश्वर की वाणी और हरि कथा के माध्यम से जन-जन तक सनातन धर्म, पर्यावरण संरक्षण तथा जीवों की रक्षा का संदेश पहुंचा रहा है। आश्रम के ब्रह्मलीन परमाध्यक्ष महंत स्वामी राजेन्द्रानंद महाराज द्वारा स्थापित परंपराओं को वर्तमान परमाध्यक्ष महंत स्वामी प्रणवानंद महाराज के सानिध्य में उनके शिष्य गांव-गांव और शहर-शहर कथाओं के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं।

इसी क्रम में बिजनौर-मुरादाबाद सीमा क्षेत्र के हिरणपुर गांव में श्री विश्नोई आश्रम भीमगोड़ा, हरिद्वार के परमाध्यक्ष महंत स्वामी प्रणवानंद महाराज के कृपापात्र शिष्य स्वामी अमृतानंद कथा व्यास द्वारा हरि कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान विष्णु की भक्ति, भगवान जम्भेश्वर की शिक्षाओं और भारतीय सनातन संस्कृति के मूल्यों से परिचित कराया जा रहा है। कथा व्यास स्वामी अमृतानंद अपनी वाणी के माध्यम से धर्म, आध्यात्मिकता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और समस्त जीव-जंतुओं के प्रति करुणा का संदेश दे रहे हैं।
कथा के दौरान महंत स्वामी प्रणवानंद महाराज ने कहा कि मनुष्य को पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन के प्रति जागरूक रहना चाहिए। प्रकृति की रक्षा करना और जीव-जंतुओं के जीवन की सुरक्षा करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षाएं केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे मनुष्य को प्रकृति, समाज और समस्त जीवात्माओं के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध भी कराती हैं। जब व्यक्ति अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाता है, तभी समाज में करुणा, सद्भाव और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण का महत्व और अधिक बढ़ गया है। पेड़-पौधों, वन्यजीवों, जलस्रोतों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक है। संतों और धार्मिक संस्थाओं के माध्यम से जनमानस तक इन संदेशों को पहुंचाना समाज में सकारात्मक जागरूकता पैदा करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
हरिद्वार से कथा में पहुंचे स्वामी जयानंद महाराज ने भी धार्मिक आयोजनों के माध्यम से सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संतों की वाणी समाज को धर्म, सदाचार, सेवा और परोपकार की प्रेरणा देती है। भगवान जम्भेश्वर की शिक्षाओं का संदेश जन-जन तक पहुंचाकर लोगों को प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संत परंपरा में जीवों के प्रति दया, प्रकृति के प्रति सम्मान और मानव कल्याण को विशेष महत्व दिया गया है। इन आदर्शों को व्यवहार में उतारकर ही धार्मिक शिक्षाओं को सार्थक बनाया जा सकता है।
श्री विश्नोई आश्रम भीमगोड़ा की ओर से संतों के सानिध्य में संचालित यह कथा अभियान धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना के साथ पर्यावरण संरक्षण तथा जीव रक्षा के विचारों को समाज तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है। भगवान जम्भेश्वर की वाणी और हरि कथा के जरिए श्रद्धालुओं को प्रेरित किया जा रहा है कि वे धर्म के मूल सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं और प्रकृति तथा समस्त जीव-जंतुओं के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएं।



