
हिन्दी हमारी संस्कृति की अमूल्य धरोहर : डॉ.अशोक गिरि
हरि न्यूज
हरिद्वार। श्रवण सेवा एवं शोध संस्थान (पंजीकृत), हरिद्वार तथा अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सेवा के संयुक्त तत्वावधान में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज के पावन सान्निध्य में हिन्दी समारोह का आयोजन श्रीकृष्ण कृपा धाम, भीमगोड़ा, हरिद्वार में किया गया। समारोह में हिन्दी भाषा, साहित्य, भारतीय संस्कृति और शिक्षा के महत्व पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान साहित्यकारों एवं हिन्दी विषय में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

समारोह की अध्यक्षता पूर्व कुलपति प्रो. दिनेश चन्द्र शास्त्री ने की। मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. पुष्पारानी (पूर्व उपनिदेशक, शिक्षा) तथा सहसंयोजिका वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाजसेविका श्रीमती रेखा सिंघल रहीं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अशोक गिरि ने किया।

समारोह के अंतर्गत डॉ. सुशील त्यागी, डॉ. बीना वशिष्ठ और लक्ष्मी डबराल को हिन्दी सेवा सम्मान प्रदान किया गया। वहीं, श्रीमती शिखा सिंघल की गद्य विधा में रचित कृति ‘रेखाचित्र’ को पुरस्कृत किया गया। हाईस्कूल की परीक्षा में हिन्दी विषय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया।

हिन्दी और भारतीय संस्कृति पर रखे विचार
कार्यक्रम में वक्ताओं ने हिन्दी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और साहित्य सृजन के महत्व पर अपने विचार रखे। डॉ. सुशील त्यागी ने श्रेष्ठ लेखन के लिए नियमित अध्ययन पर बल दिया। डॉ. बीना वशिष्ठ ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मातृभाषा का सम्मान करना चाहिए। डॉ. अशोक गिरि ने हिन्दी को मातृभाषा, राजभाषा और संपर्क भाषा के साथ भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया।
मुख्य अतिथि डॉ. ललित नारायण मिश्र ने सरस, सरल और सहज साहित्य सृजन की आवश्यकता पर जोर दिया। समारोह के अध्यक्ष प्रो. दिनेश चन्द्र शास्त्री ने मातृभाषा के साथ-साथ अधिक से अधिक अन्य भाषाएं सीखने की बात कही।
श्रीमती विद्योत्तमा बहुगुणा ने ‘आधुनिक शिक्षा एवं गीता के मूल्य-दर्शन’ विषय पर विचार व्यक्त किए। वहीं, डॉ. पुष्पारानी ने ‘भारतीय संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में हिन्दी दिवस की प्रासंगिकता’ विषय पर अपने विचार रखे।

कविता पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समारोह में वृन्दा शर्मा ने सरस्वती वंदना, मीनाक्षी ने स्वागत गीत और अपराजिता ने शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया। कविता पाठ सत्र का संचालन अभिषेक भारद्वाज ने किया। इस दौरान वृन्दा वाणी, अपराजिता उन्मुक्त, डॉ. विजय त्यागी, डॉ. दीनदयाल दीक्षित, सुरेन्द्र कुमार, के.पी. सिंह, अमित कुमार, डॉ. मेनका त्रिपाठी, अभिषेक भारद्वाज, एस. कुमार पन्त, रविदत्त वर्मा और पुष्प राज धीमान सहित अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
समारोह में पत्रकार सुभाष कपिल,प्रमोद गिरि, एड.कुणाल गिरि, चाँद गिरि, पंकज गिरि, अरुण शुक्ल, देवकीनन्दन शर्मा, अमरपाल सिंह और साक्षी भट्ट सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।




