
*2027 कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर अपर कुंभ मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती सजग मेला क्षेत्र में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की कवायद की तेज,श्रद्धालुओं की सुविधाओं और व्यवस्थाओं को आधुनिक स्वरूप देने पर विशेष जोर
हरि न्यूज
हरिद्वार। विश्व के विख्यात धार्मिक आयोजनों में शामिल आगामी 2027 के कुंभ मेले को लेकर हरिद्वार में तैयारियों का दौर तेज होता नज़र आ रहा है। कुंभ मेला प्राधिकरण एवं प्रशासन से जुड़े आला अधिकारी मेला आयोजन को व्यवस्थित,सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए विभिन्न विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में जुटे हुए हैं। कुंभ मेले के आयोजन को केवल धार्मिक पर्व तक सीमित न रखते हुए हरिद्वार की आधारभूत व्यवस्थाओं को मजबूत करने और शहर को भविष्य की दृष्टि से आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर आधिकारियों द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इसी क्रम में अपर कुंभ मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती की सक्रियता भी चर्चा में है। वह कुंभ मेला क्षेत्र से संबंधित विकास कार्यों एवं व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों के साथ समन्वय बनाते हुए विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा में आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। उनकी कार्यशैली में विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने के साथ-साथ मेला आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली संभावित समस्याओं को पहले से चिन्हित कर उनके समाधान की दिशा में प्रयास किए जाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
बता दे कि कुंभ मेला हरिद्वार की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान से सीधे जुड़ा विश्व विख्यात धार्मिक आयोजन है। प्रत्येक कुंभ के दौरान देश ओर दुनिया के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत, अखाड़ों के प्रतिनिधि एवं तीर्थयात्री हरिद्वार पहुंचते हैं। ऐसे में करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हरिद्वार में यातायात, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग, घाटों, संपर्क मार्गों तथा अन्य नागरिक सुविधाओं को मजबूत करना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती रहती है।

अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती द्वारा समयबद्ध विकास कार्यों पर विशेष जोर
आगामी कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपर कुंभ मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती की ओर से भी अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्यों की प्रगति पर ध्यान केंद्रित किए जाने की बात सामने आ रही है। मेला क्षेत्र से जुड़े कार्यों में समयबद्धता बनाए रखने से आयोजन के अंतिम चरण में निर्माण एवं व्यवस्थाओं से संबंधित दबाव को कम किया जा सकता है।
कुंभ मेले की तैयारियों का दायरा केवल मेला क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हरिद्वार शहर और आसपास के क्षेत्रों की व्यवस्थाएं भी इससे सीधे प्रभावित होती हैं। श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए संपर्क मार्गों, यातायात प्रबंधन, पार्किंग एवं भीड़ नियंत्रण से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करना भी तैयारियों का अहम हिस्सा है।
कुंभ मेला में धार्मिक स्वरूप के साथ आधुनिक सुविधाओं का समन्वय
कुंभ नगरी हरिद्वार की सबसे बड़ी विशेषता उसकी प्राचीन धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहचान है। ऐसे में अपर कुंभ मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती द्वारा विकास योजनाओं के साथ शहर के धार्मिक स्वरूप, गंगा घाटों की गरिमा और सनातन परंपराओं के संरक्षण भी महत्वपूर्ण ध्यान दिया जा रहा है। उनके द्वारा आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करते हुए हरिद्वार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक पहचान को बनाए रखना आगामी कुंभ की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।
अपर कुंभ मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती के स्तर से विकास कार्यों को लेकर दिखाई जा रही सक्रियता के बीच मेला क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं को गति देने की कवायद जारी है। प्रशासनिक स्तर पर योजनाओं की निगरानी, विभागों के बीच समन्वय और निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कुंभ के साथ हरिद्वार के दीर्घकालिक विकास की भी सोच है दयानंद सरस्वती की
कुंभ जैसे बड़े आयोजन के लिए तैयार की जाने वाली आधारभूत सुविधाओं का लाभ मेला समाप्त होने के बाद भी हरिद्वार वासियों और यहां आने वाले तीर्थयात्रियों को मिल सके, इस सोच को लेकर अपर कुंभ मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती विकास कार्यों को लेकर सजग दिखाई पड़ रहें हैं । यही कारण है कि कुंभ की तैयारियों के साथ साथ ऐसे विकास कार्यों को भी महत्व दिया जा रहा है जो शहर की दीर्घकालिक जरूरतों को भी पूरा कर सकें।
2027 का कुंभ मेला हरिद्वार के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ व्यवस्थागत दृष्टि से भी महत्वपूर्ण अवसर है। ऐसे में मेला प्राधिकरण के अधिकारियों के सामने एक ओर जहां विशाल धार्मिक आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की जिम्मेदारी है, तो वहीं दूसरी ओर हरिद्वार को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने की चुनौती भी है। अब देखने वाली बात ये होगी कि आने वाले महीनों में विकास योजनाओं की प्रगति और उनके धरातलीय स्वरूप से यह स्पष्ट होगा कि कुंभ से पहले हरिद्वार की व्यवस्थाओं में किस स्तर तक बदलाव आता है।
