
“99 रचनाकारों की 101 कविताओं में भारतीय पेड़-पौधों और पुष्पों की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक यात्रा”
हरि न्यूज
नई दिल्ली। भारतीय प्रकृति,पर्यावरण और समृद्ध हरित परंपरा को साहित्य के माध्यम से वैश्विक मंच तक पहुँचाने वाली पुस्तक ‘भारतीय हरित धरोहर’ ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित की है। पुस्तक को हिन्द बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया है। इस उपलब्धि ने हिंदी साहित्य के साथ-साथ भारतीय प्रकृति और पर्यावरण चेतना को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी है।
इंडोनेशिया की साहित्यकार इंदु नांदल के संपादन में प्रकाशित इस विशिष्ट कृति में विश्व के विभिन्न देशों से जुड़े 99 रचनाकारों की 101 कविताएँ संकलित हैं। इन कविताओं का केंद्र भारतीय पेड़, पौधे और फूल हैं। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाले रचनाकारों ने भारतीय वनस्पति संसार को अपनी स्मृतियों, अनुभूतियों और साहित्यिक दृष्टि से शब्द प्रदान किए हैं।
‘भारतीय हरित धरोहर’ की विशेषता केवल इसका विषय और विश्व रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि इसकी वह व्यापक दृष्टि है, जिसमें पेड़-पौधों और फूलों को भारतीय जीवन एवं संस्कृति के जीवंत प्रतीकों के रूप में देखा गया है। भारतीय परंपरा में प्रकृति के साथ रहे आत्मीय संबंध, लोक-स्मृतियाँ, सांस्कृतिक मान्यताएँ और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व इन कविताओं में विविध रूपों में अभिव्यक्त हुआ है।
भारत से इंडोनेशिया तक जुड़ी साहित्यिक संवेदना
इस महत्वपूर्ण साहित्यिक पहल को विश्वभर से सम्मान और शुभकामनाएँ प्राप्त हुई हैं। इंडोनेशिया में भारत के राजदूत श्री रविशंकर गोयल ने भी ‘भारतीय हरित धरोहर’ की इस उपलब्धि पर अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं।
भारत से डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’, श्रीमती सावित्री धायल, प्राची अग्रवाल, गिरीश गुप्ता, डॉ. जयेश नारायण भानु और डॉ. योगिता सिंह सहित अनेक साहित्यकारों ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। अमेरिका से डॉ. दुर्गा सिन्हा, सुमन श्रीवास्तव एवं मंजू श्रीवास्तव, यू के से श्रीमती स्वर्ण तलवार, दुबई से डॉ. अमृत बसरिया, कनाडा से साहिल नांदल, शिखा पोरवाल तथा इंडोनेशिया से श्री संजीव नांदल जी, डॉ. सोनिया वशिष्ठ सहित विश्व के विभिन्न देशों से जुड़े साहित्यकारों और शुभचिंतकों ने भी अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं।
साहित्य के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश
आज जब पर्यावरणीय संकट वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है, ऐसे समय में भारतीय पेड़-पौधों और फूलों को केंद्र में रखकर किया गया यह साहित्यिक प्रयास विशेष महत्व रखता है। पुस्तक की कविताएँ प्रकृति के सौंदर्य का वर्णन करने के साथ-साथ मनुष्य और प्रकृति के बीच टूटते संबंधों की ओर भी संकेत करती हैं।
संपादक इंदु नांदल की यह पहल विभिन्न देशों में बसे भारतीय और हिंदी प्रेमी रचनाकारों को एक साझा रचनात्मक मंच प्रदान करती है। यह संकलन इस विचार को मजबूती देता है कि प्रकृति किसी एक देश या भूगोल की संपत्ति नहीं, बल्कि समूची मानवता की साझा धरोहर है।
‘भारतीय हरित धरोहर’ को मिला हिन्द बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड केवल एक साहित्यिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय प्रकृति, संस्कृति और पर्यावरण चेतना को विश्व पटल पर सम्मान दिलाने वाला सामूहिक प्रयास है।
यह उपलब्धि उन सभी रचनाकारों, संपादक, साहित्यप्रेमियों और शुभचिंतकों को समर्पित है, जिन्होंने शब्दों के माध्यम से भारतीय हरित विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजने और विश्व तक पहुँचाने का संकल्प लिया है।
