
हरि न्यूज
नजीबाबाद। सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत नजीबाबाद निवासी रितेश कुमार पुत्र करण सिंह ने राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) से संबंधित विभिन्न वित्तीय एवं प्रशासनिक बिंदुओं पर महत्वपूर्ण सूचनाएं मांगी हैं। इस संबंध में क्षेत्रीय निदेशक, राष्ट्रीय सेवा योजना, क्षेत्रीय निदेशालय, अलीगंज, लखनऊ को आवेदन भेजा गया था।

आरटीआई आवेदन में वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 के दौरान प्रदेश के राज्य एवं विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत आवंटित छात्र संख्या का विश्वविद्यालयवार विवरण मांगा गया है। इसके साथ ही इन वर्षों में राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ को प्राप्त अनुदान तथा विश्वविद्यालयों को वितरित अनुदान का वर्षवार एवं विश्वविद्यालयवार प्रमाणित विवरण भी मांगा गया है।
आवेदन में यह भी जानकारी मांगी गई है कि उक्त वित्तीय वर्षों में किन-किन विश्वविद्यालयों की अनुदान प्रतिपूर्ति धनराशि शासन स्तर पर अवशेष है और यदि कोई राशि लंबित है तो उसके कारण क्या हैं। इसके अलावा राज्य सलाहकार समिति की बैठकें आयोजित हुईं या नहीं, यदि हुईं तो उनमें पारित प्रस्तावों एवं कार्यवाही का प्रमाणित विवरण भी मांगा गया है।
आरटीआई में राज्य संपर्क अधिकारी द्वारा विभिन्न विश्वविद्यालयों में किए गए कार्यों के लिए किए गए भ्रमण, यात्रा एवं अन्य व्यय तथा उसके लिए राष्ट्रीय सेवा योजना से प्राप्त भुगतान का विवरण भी मांगा गया है।
विशेष रूप से वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय सेवा योजना को दिए गए अनुदान और उसमें से विभिन्न विश्वविद्यालयों को वितरित धनराशि का ब्यौरा मांगा गया है। आवेदन में यह भी पूछा गया है कि लगभग 17 करोड़ रुपये के अनुदान की धनराशि प्राप्त होने के बावजूद यदि विश्वविद्यालयों द्वारा उसका उपयोग नहीं किया गया अथवा धनराशि खर्च नहीं की गई, तो इसका कारण क्या है और इसके लिए कौन-कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं।
क्षेत्रीय निदेशालय, राष्ट्रीय सेवा योजना, अलीगंज, लखनऊ की ओर से 12 अगस्त 2026 को भेजे गए पत्र में बताया गया कि आरटीआई आवेदन में मांगी गई सूचनाएं राज्य एनएसएस प्रकोष्ठ/उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन से संबंधित हैं। इसलिए सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत आवेदन को आवश्यक कार्रवाई एवं सूचना उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को अंतरित किया गया है।
आरटीआई आवेदक रितेश कुमार का कहना है कि राष्ट्रीय सेवा योजना से संबंधित सरकारी धनराशि, छात्र संख्या आवंटन और विश्वविद्यालयों को दिए गए अनुदान की पारदर्शी जानकारी सामने आना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि केंद्र एवं राज्य सरकार से प्राप्त धनराशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए किस प्रकार किया गया।
