
*संत निराला स्वामी महाराज को संत-महंतों, महामंडलेश्वरों एवं श्रद्धालु भक्तों ने अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि
*त्याग,तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति थे ब्रह्मलीन निराला स्वामी-राजमाता आशा भारती
हरि न्यूज
हरिद्वार, 28 जुलाई। उत्तरी हरिद्वार की प्रख्यात धार्मिक संस्था श्री निराला धाम की परमाध्यक्ष राजमाता आशा भारती महाराज के पावन सानिध्य में गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं श्रद्धांजलि समारोह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच आयोजित किया गया। समारोह में ब्रह्मलीन संत निराला स्वामी जी महाराज को संत-महंतों, महामंडलेश्वरों एवं श्रद्धालु भक्तों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर संत समाज ने ब्रह्मलीन संत के जीवन, तपस्या, त्याग और समाज सेवा को स्मरण करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिय।

समारोह को संबोधित करते हुए संस्था की परमाध्यक्ष पूज्या राजमाता आशा भारती महाराज ने कहा कि गुरु पूर्णिमा सनातन संस्कृति का अत्यंत पावन पर्व है। गुरु ही शिष्य के जीवन को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान और सत्य के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु का सानिध्य और उनका आशीर्वाद मनुष्य के जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन संत निराला स्वामी जी महाराज का संपूर्ण जीवन धर्म, अध्यात्म, साधना और मानव सेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने अपने तप और साधना से सनातन धर्म की महान परंपराओं को आगे बढ़ाने का कार्य किया।
राजमाता आशा भारती महाराज ने कहा कि संतों का जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत होता है। ब्रह्मलीन संतों की देह भले ही हमारे बीच नहीं होती, लेकिन उनके विचार, आदर्श और उनके द्वारा किए गए लोककल्याण के कार्य सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे संतों के बताए मार्ग पर चलकर धर्म, सेवा, संस्कार और सद्भाव को अपने जीवन का आधार बनाएं।

इस अवसर पर महंत नित्यानन्द महाराज ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर है। भारतीय सनातन परंपरा में गुरु को ईश्वर के समान सम्मान दिया गया है, क्योंकि गुरु ही शिष्य को जीवन का वास्तविक ज्ञान प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन संत निराला स्वामी जी महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन सनातन धर्म की सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित किया। उनका तपस्वी जीवन और आध्यात्मिक साधना सदैव संत समाज एवं श्रद्धालुओं को प्रेरणा देती रहेगी।
महंत नित्यानन्द महाराज ने कहा कि आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी संतों और महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं से जुड़े। संतों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना और उनके आदर्शों को जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
समारोह में संत-महंतों एवं महामंडलेश्वरों ने ब्रह्मलीन संत निराला स्वामी जी महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन एवं गुरु पूजन का आयोजन भी किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने समारोह में सहभागिता कर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान पूरा श्री निराला धाम परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन निराला स्वामी लहरी बाबा परम शिव भक्त थे। उनके सानिध्य में आने वाले भक्तों का जीवन निष्कंटक हो जाता था। उन्होंने कहा कि सभी को ब्रह्मलीन निराला स्वामी लहरी बाबा के त्याग और तपस्या से परिपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। स्वामी रविदेव शास्त्री और स्वामी हरिहरानंद ने कहा कि राजमाता आशा भारती वयोवृद्ध अवस्था में भी जिस प्रकार अपने गुरूओं की परंपरांओं को आगे बढ़ा रही हैं। वह सभी के लिए प्रेरणादायी है। राजमाता आशा भारती के शिष्य स्वामी नित्यानंद ने फूलमाला पहनाकर सभी संतों का स्वागत किया और आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर स्वामी दिनेश दास, स्वामी शिवानंद, महंत शुभम गिरी, महंत राघवेंद्र दास, पूर्व पार्षद अनिरुद्ध भाटी, पार्षद सूर्यकांत शर्मा सहित अनेक संत महंत और श्रद्धालु मौजूद रहे।
