
हरि न्यूज
हरिद्वार। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देशन में हरिद्वार पुलिस ने आईसीआईसीआई बैंक के एक खाते से करीब 50 लाख रुपये की संदिग्ध निकासी के मामले का खुलासा करते हुए एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 13 लाख रुपये नकद, एक स्कूटी, 12 लाख रुपये में खरीदे गए प्लॉट की रजिस्ट्री, फर्जी दस्तावेज, डेबिट कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मामले में अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

कोतवाली नगर पुलिस के अनुसार, आईसीआईसीआई बैंक की पुराना रानीपुर मोड़ शाखा के प्रबंधक अपूर्व दुबे ने 8 अक्टूबर 2025 को शिकायत दर्ज कराई थी कि बैंक के एक खाते से पिछले एक माह में लगभग 50 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन हुए हैं। खाताधारक ने बैंक की बेंगलुरु शाखा में शिकायत कर बताया कि निकासी उसकी जानकारी के बिना की गई है। शिकायत के आधार पर कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
विवेचना के दौरान पुलिस को कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर मिले। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 18 जुलाई 2026 को भगवानपुर और मंडावर क्षेत्र में दबिश दी। मंडावर के खेड़ी शिकोहरपुर के पास एक खेत के निकट खड़ी स्कूटी के पास तीन संदिग्ध दिखाई दिए। पुलिस को देखते ही तीनों भागने लगे, लेकिन पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संगीता देवी, उपेंद्र कुमार सहगल और रीनू कुमार उर्फ सोनू कुमार के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान पुलिस ने तीनों के पास से कुल 13 लाख रुपये नकद, आकाश सिन्हा के नाम का आईसीआईसीआई बैंक डेबिट कार्ड, डेबिट कार्ड आवेदन पत्र, दो फर्जी आधार कार्ड, तीन मोबाइल फोन, एक स्कूटी तथा प्लॉट की रजिस्ट्री बरामद की।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने फर्जी आधार कार्ड और फोन बैंकिंग का दुरुपयोग कर खाताधारक के नाम से नया डेबिट कार्ड जारी कराया। इसी कार्ड के माध्यम से एटीएम से नकदी निकाली गई और लगभग 35 लाख रुपये की ज्वेलरी खरीदी गई। बाद में ज्वेलरी बेचकर मिले पैसों से 12 लाख रुपये का प्लॉट खरीदा गया तथा अन्य रकम आपस में बांट ली गई।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी बड़ी कंपनियों के बैंक खातों की जानकारी जुटाकर बैंकिंग प्रणाली की कमियों का फायदा उठाते थे। फर्जी दस्तावेजों और फोन बैंकिंग के माध्यम से डेबिट कार्ड जारी कराकर खातों से रकम निकालते थे। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों की नजर कई अन्य कंपनियों के खातों पर भी थी।
पुलिस के अनुसार, उपेंद्र कुमार और सोनू कुमार वर्ष 2022 में एटीएम फ्रॉड के मामले में जेल जा चुके हैं, जबकि सोनू कुमार वर्ष 2013 के एक हत्या के मामले में भी जेल रह चुका है।
मामले में बरामद साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की अन्य धाराएं भी बढ़ाई गई हैं। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा।
