
*उत्तरी हरिद्वार में नाले की सफाई के नाम पर हुआ खेला?
*खनन सामग्री के निस्तारण पर उठे गंभीर सवाल

हरि न्यूज
हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार क्षेत्र में नगर निगम द्वारा कराई जा रही नालों की सफाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक राजनीतिक दल की शिकायत पर मौके का निरीक्षण करने पहुंचे जिला खनन अधिकारी और शिकायतकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। आरोप है कि जांच के दौरान जिला खनन अधिकारी ने शिकायतकर्ता के साथ अभद्र व्यवहार किया तथा मौके पर मौजूद एक प्रिंट मीडिया कर्मी का मोबाइल फोन भी झपटने की कोशिश की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो के संज्ञान में आने के बाद खनन अधिकारी को निदेशालय स्तर पर अटैच कर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार स्थानीय सामाजिक संगठनों और क्षेत्रवासियों का आरोप है कि नगर निगम ने नाले की सफाई के लिए ठेका दिया था, लेकिन सफाई के दौरान निकाली गई लाखों रुपये मूल्य की खनन सामग्री को नियमानुसार निस्तारित करने के बजाय एक विवादित निजी संपत्ति पर डाला जा रहा था। लोगों का कहना है कि यदि यह सामग्री सरकारी राजस्व के दायरे में आती थी तो उसके उचित प्रबंधन और नीलामी के माध्यम से सरकार को राजस्व प्राप्त हो सकता था, लेकिन कथित अनियमितता के कारण सरकारी खजाने को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है।
क्षेत्रीय लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर किसके निर्देश पर और किसकी सहमति से इतनी बड़ी मात्रा में निकाली गई सामग्री को विवादित भूमि पर डाला गया। उनका कहना है कि सफाई कार्य के लिए ठेकेदार को अलग से भुगतान किया जाना था, ऐसे में निकाली गई सामग्री के उपयोग और निस्तारण की पारदर्शी व्यवस्था क्यों नहीं अपनाई गई।
मामले ने अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित अनियमितता के लिए कौन जिम्मेदार है और यदि सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा है तो उसकी भरपाई किस प्रकार की जाएगी।
वहीं, क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि नगर निगम, खनन विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
