
हरि न्यूज
हरिद्वार। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार जर्नलिस्ट एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष समाजसेवी पूजा राजपूत ने बताया कि मानव सेवा ही जीवन का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। जरूरतमंद, निर्धन, असहाय और निर्बल लोगों की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से मानव सेवा करता है, वह वास्तव में ईश्वर की सच्ची आराधना करता है। सेवा भाव से किया गया कार्य समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और जरूरतमंदों के जीवन में नई उम्मीद जगाता है।
पूजा राजपूत ने कहा कि हमारे शास्त्रों और संत महापुरुषों ने भी मानव सेवा को सर्वोपरि बताया है। उन्होंने कहा कि भगवान श्री नारायण भी उन्हीं लोगों पर प्रसन्न होते हैं जो दीन-दुखियों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। गरीबों, असहायों और पीड़ितों की मदद करना केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक सक्षम व्यक्ति को अपने सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज में सेवा, सहयोग और परोपकार की भावना को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। कई लोग भोजन, वस्त्र, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं, ऐसे में समाज के सक्षम वर्ग को आगे आकर उनके सहयोग के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव सेवा से न केवल जरूरतमंदों को राहत मिलती है, बल्कि समाज में भाईचारा, सद्भाव और एकता भी मजबूत होती है।
पूजा राजपूत ने कहा कि युवा पीढ़ी को भी सेवा कार्यों से जुड़ना चाहिए और समाजहित में योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति एक जरूरतमंद की मदद करने का संकल्प ले, तो समाज से अनेक समस्याओं का समाधान संभव हो सकता है। मानवता, करुणा और सेवा का मार्ग ही जीवन को सार्थक बनाता है। उन्होंने सभी लोगों से आह्वान किया कि वे सेवा भाव को अपनाकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।
