
हरि न्यूज
रचनाकार
(अब्दुल सलाम कुरैशी)
जिला -गुना (म. प्र.)

*”हम धरा के लाल हैं”*
हम धरा के लाल हैँ,
हम बहुत मालामाल हैं।
वो सब अमृत हैं धरा पर,
जिसमें हमारी काया बसती है।
धरा हमारी प्यारी माता,
जीवन की वो करती रखवाली।
हरियाली फूलों से भरी है गोद उसकी,
हमको देख-देख मुस्कुराती।
नील गगन की छाँह निराली,
पक्षी चहके महकी हरियाली।
धरा कह रही है बार-बार,
हे सुनले रे मानव मेरी पुकार।
पेड़-पौधों को मत काटो,
मत उजाड़ो मेरा सुहाग।
पेड़ लगाओ जल बचाओ,
धरा का करो खूब श्रृंगार।
