
हरि न्यूज
बिजनौर।शनिवार को रमा त्यागी “एकाकी”के काव्य संग्रह “एक उदास दिन का गीत” का साहित्य अकादमी के सभागार में शानदार लोकार्पण हुआ।कस्तूरी संस्था के तत्वावधान के अंतर्गत आयोजित इस परिचर्चा की अध्यक्षता दूरदर्शन के भूतपूर्व महानिदेशक अमरनाथ अमर ने की ।
कार्यक्रम के मुख्यातिथि सुजीत कुमार रहे। इस परिचर्चा में डॉ वंदना वाजपेयी , डॉ चैताली,त्रिलोक कौशिक ने अपने वक्तव्य में कविताओं की सटीक समीक्षा की।कार्यक्रम का संयोजन और संचालन डॉ विशाल पांडेय ने किया।

कार्यक्रम में लक्ष्मीशंकर वाजपेयी,ममता किरण,ओम प्रकाश प्रजापति,अशोक,कवि नीरज त्यागी,राजपाल यादव, देवव्रत,अनिल ‘मीत’ ग़ज़लकार रजनीश त्यागी ‘राज’, विवेक कवीश्वर,मीना चौधरी,पूनम मल्होत्रा ,डॉ पूजा भारद्वाज,डॉ ईशा भारद्वाज शिवम झा कबीर एवं अन्य कवि और साहित्यकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को शोभायमान किया।कवयित्री रमा त्यागी “एकाकी” के अनुसार यह काव्य संग्रह स्त्री के मन की उथल पुथल,संघर्ष और जिजीविषा को संजोने का संग्रह है।सुजीत कुमार ने “एक उदास दिन का गीत “काव्य संग्रह की कविताओं को निराशा में आशा की किरण का उजास बतलाया।डॉ चैताली ने इस संग्रह की कविता “स्त्री सज़ा देती है हर दर और दीवार को,घर के कोने कोने को स्वयं को सजा देकर “ में स्त्री की पीड़ा हर हृदय को स्पर्श करती है।डॉ वंदना पांडे ने रमा त्यागी की कविताओं को गहन वेदना की सहज अभिव्यक्ति बताया।त्रिलोक कौशिक ने काव्य संग्रह की बहुत ही सशक्त भूमिका लिखी है।उन्होंने कहा कि इस काव्य संग्रह की कविताओं में दुख ऊपर ही ऊपर दिखता है लेकिन ये कविताएँ भीतर बहुत सुकून देती हैं ।अध्यक्ष अमरनाथ अमर ने उनकी कविताओं को बिखरकर सँवरने की कवितायें बताया । उन्होंने कहा कि इन कविताओं में संघर्ष तो है लेकिन उनके मूल में प्रेम है ।
रमा त्यागी “एकाकी” मूलतः राजा का ताजपुर, बिजनौर से हैं।वर्तमान में वे ग़ाज़ियाबाद रहती हैं।वे एक सेवानिवृत शिक्षिका और लेखिका हैं।उनकी मुक्त छन्द की कविताएं बहुत पसंद की जाती हैं ।कविताओं के अलावा वे गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, भूमिका और समीक्षा भी लिखती हैं । मंचों पर उनकी कविताओं को बहुत सराहा जाता है और उन्हें कई सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है ।
