
राजबीर सिंह चौहान ने चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल, पूनम भगत ने घटना को बताया शर्मनाक
हरि न्यूज(अजय कुमार)
हरिद्वार। किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ के साथ हुई कथित बदसलूकी और हाथापाई के विरोध में गुरुवार को महानगर कांग्रेस कमेटी एवं कांग्रेस नेताओं ने हरिद्वार में प्रदर्शन कर आक्रोश जताया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रानीपुर मोड़ स्थित चंद्राचार्य चौक और शिवालिक नगर चौक पर पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने घटना के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

चंद्राचार्य चौक पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान इंटक के प्रदेश अध्यक्ष राजबीर सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि 22 सितंबर को रुद्रप्रयाग में निकाय चुनाव के स्ट्रांग रूम के पास कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ के साथ भाजपा नेता राजेश शुक्ला एवं उनके समर्थकों द्वारा हाथापाई की गई। उन्होंने कहा कि स्ट्रांग रूम क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी के बावजूद हुई इस घटना से चुनावी माहौल प्रभावित हुआ। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।

राजबीर सिंह चौहान ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि घटना के बाद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं में इसको लेकर नाराजगी है। उन्होंने “उत्तराखंड में भाजपा और चुनाव आयोग का अदृश्य गठबंधन” होने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए निर्वाचन संबंधी मामलों में सभी पक्षों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।

वहीं शिवालिक नगर चौक पर वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री पूनम भगत, मोहन राणा और जिला अध्यक्ष बालेश्वर कैलाशसहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में भाग लिया। पूनम भगत ने तिलक राज बेहड़ के साथ हुई कथित बदसलूकी को शर्मनाक बताते हुए मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के साथ इस प्रकार की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि पूरे प्रकरण की जांच कर घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट की जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि चुनाव से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की शिकायत होने पर संबंधित संवैधानिक एवं प्रशासनिक संस्थाओं को निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर लोगों का विश्वास बना रहे।
