
हरि न्यूज
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में सप्ताहभर तक चले आर्य वीर दल एवं आर्या वीरांगना दल के प्रशिक्षण शिविर का समापन रविवार को आर्य दीक्षांत एवं भव्य समापन समारोह के साथ हुआ। ध्वजारोहण, वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञीय वातावरण के बीच आयोजित कार्यक्रम में देशभर से आए प्रशिक्षणार्थियों को राष्ट्रभक्ति, वैदिक संस्कृति और चरित्र निर्माण का संदेश दिया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए सार्वदेशिक आर्य वीर दल, दिल्ली के शिविर प्रशिक्षण व्यवस्थापक बृहस्पति आर्य ने कहा कि व्यक्ति की जीवनशैली सरल, सात्विक और सहयोग की भावना से परिपूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मातृवान, पितृवान और आचार्यवान संतान ही राष्ट्र को सुरक्षित एवं सशक्त बना सकती है तथा समाज की उन्नति का आधार श्रेष्ठ संस्कार हैं।
वैदिक विद्वान डॉ. योगेश भारद्वाज ने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव व्यक्ति के भीतर संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों का विकास करता है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से आर्य समाज और गुरुकुल की वैदिक विचारधारा को जीवन में आत्मसात कर समाज के उत्थान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. एल.पी. पुरोहित ने आर्य समाज को जनजागरण और सामाजिक क्रांति का अग्रदूत बताते हुए कहा कि युवाओं में तार्किक सोच और आत्मचिंतन की क्षमता लगातार घट रही है, जिसके लिए उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव को भी एक कारण बताया। उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण शिविरों को समय की आवश्यकता बताया।
उत्तराखंड आर्य समाज के विचारक डॉ. श्याम सिंह ने आर्य वीर एवं आर्या वीरांगनाओं को आर्य समाज की नई पौध बताते हुए परिवार, रिश्तों और भारतीय संस्कृति को सहेजने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शास्त्र के साथ शस्त्र का ज्ञान भी आज के युवाओं के लिए आवश्यक है।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रशिक्षक धर्मवीर आर्य के निर्देशन में प्रशिक्षणार्थियों द्वारा प्रस्तुत नानचाक, तलवार, फरसा एवं दंड संचालन के हैरतअंगेज प्रदर्शन रहे। इसके साथ ही पिरामिड एवं स्तूप निर्माण की आकर्षक प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह की खूब तालियां बटोरी।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि लाठी केवल एक अस्त्र नहीं बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा का प्रतीक है। यदि युवाओं का शौर्य और साहस कमजोर पड़ा तो राष्ट्र की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रसेवा, वैदिक ज्ञान परंपरा के संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन के लिए आगे आने का आह्वान किया।
समापन अवसर पर शिविर में दीक्षित आर्य वीर एवं आर्या वीरांगनाओं को अतिथियों द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं वैदिक साहित्य प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संयोजन डॉ. संदीप वेदालंकार, डॉ. अंकित एवं डॉ. मनोज ने किया।

इस अवसर पर प्रो. नवनीत, प्रो. लक्ष्मी प्रसाद पुरोहित, प्रो. अरुण कुमार, प्रो. नितिन काम्बोज, डॉ. वीरेन्द्र सिंह, डॉ. पवन आर्य, डॉ. संजील कुमार, डॉ. मयंक पोखरियाल, डॉ. अजय मलिक, डॉ. शिव कुमार चौहान, डॉ. भारत वेदालंकार, डॉ. विपिन कुमार शर्मा, डॉ. दीपिका, डॉ. विपिन बालियान, डॉ. विकास राणा सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, प्रशिक्षक, आर्य समाज के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।
