
*पतित पावनी गंगा: कुंडलियाँ छंद*
शापित पुरखे तारने,
मन में ले संकल्प।
भागीरथ ने तप किया,
ब्रह्मा दिया विकल्प।।
ब्रह्मा दिया विकल्प,
स्वर्ग से भेजी गंगा।
चली बहुत उद्वेग,
देख डर रूप बेढंगा।।
दिया शीश स्थान,
शिवा लट खोली आश्रित,
बन भगीरथ आज,
मुक्ति पाते है शापित।।
भगवान दास शर्मा “प्रशांत”
शिक्षक सह साहित्यकार
इटावा उत्तर प्रदेश
ईमेल: prashantunorg@gmail.com
