
*कुंभ से पहले सनातन को बदनाम करने की साजिश? AI से बनाए फर्जी वीडियो पर संत समाज में आक्रोश
*कुंभ की आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, सनातन और संत परंपरा को बदनाम करने की कोशिश कामयाब नहीं होने देंगे:श्रीमहंत रविंद्रपुरी
हरि न्यूज
हरिद्वार। तीर्थनगरी हरिद्वार स्थित श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी की मां मनसा देवी चरण पादुका स्थल पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉक्टर रविंद्रपुरी महाराज ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित आपत्तिजनक एवं भ्रामक वीडियो को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।
श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने बयान जारी कर कहा कि हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में होने वाले कुंभ पर्वों को लेकर सनातन समाज और संत परंपरा को बदनाम करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री प्रसारित किए जाने की आशंका है। उन्होंने कहा कि तकनीक और विशेष रूप से AI का दुरुपयोग कर बनाए गए कथित फर्जी वीडियो से संतों, अखाड़ों और सनातन धर्म की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।
AI तकनीक का दुरुपयोग कर सनातन को बदनाम करने का आरोप
श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी वीडियो के वायरल होने मात्र से उसे सत्य नहीं मान लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विरोधी तत्व AI तकनीक का सहारा लेकर ऐसी सामग्री तैयार कर रहे हैं, जिससे जनता में भ्रम पैदा हो और संत समाज की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे।
उन्होंने कहा कि “सनातन और संत परंपरा को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया को हथियार बनाया जा रहा है, लेकिन ऐसी किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।”
उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की कि वायरल वीडियो की तकनीकी जांच कर उसकी वास्तविकता सामने लाई जाए और यदि किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर फर्जी सामग्री तैयार कर प्रसारित की गई है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री धामी से जांच और कार्रवाई की मांग
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कथित फर्जी एवं भ्रामक वीडियो की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा कि आगामी कुंभ पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे समय में अफवाह, फर्जी वीडियो और भ्रामक प्रचार से संत समाज, अखाड़ों और सनातन संस्कृति की छवि को नुकसान पहुंचाना गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति तकनीक का दुरुपयोग कर संत समाज को बदनाम करने का साहस न कर सके।
“महामंडलेश्वर पद पैसे से खरीदने का आरोप भ्रामक”
सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित वीडियो में अखाड़ों द्वारा पैसे लेकर महामंडलेश्वर बनाए जाने के दावे पर भी श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने स्पष्टीकरण दिया।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार का आरोप अखाड़ों की परंपरा और व्यवस्था को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि जब किसी संत को महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की जाती है तो धार्मिक परंपराओं के अनुरूप भंडारा, साज-सज्जा, मंच, साउंड सहित विभिन्न व्यवस्थाएं की जाती हैं, जिनमें खर्च होता है।
उनके अनुसार, इन व्यवस्थाओं का खर्च संबंधित महामंडलेश्वर बनने वाले संत की ओर से किया जाता है और इसे अखाड़े द्वारा महामंडलेश्वर की उपाधि देने के बदले अतिरिक्त धनराशि लेने के रूप में प्रस्तुत करना गलत है।
उन्होंने कहा कि अखाड़ों की अपनी प्राचीन धार्मिक परंपराएं और मर्यादाएं हैं तथा महामंडलेश्वर की परंपरा को सोशल मीडिया के कुछ वीडियो के आधार पर गलत तरीके से परिभाषित करना संत समाज के प्रति अन्याय है।
कुंभ की आस्था पर फर्जी कंटेंट की छाया डालने की कोशिश—संत समाज सतर्क
श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि संत समाज सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे ऐसे कंटेंट को लेकर पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने सनातन समाज से भी अपील की कि किसी भी वीडियो को सत्यापित किए बिना उसे आगे शेयर न करें।
उन्होंने कहा—
“सनातन की शक्ति उसकी आस्था, परंपरा और संत समाज की एकता में है। तकनीक का इस्तेमाल ज्ञान और समाजहित के लिए होना चाहिए, न कि किसी धर्म, संत या संस्था की छवि खराब करने के लिए।”
उन्होंने कहा कि संत-अखाड़े सदियों से सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और समाज को दिशा देने का कार्य करते आए हैं। किसी भी संस्था या व्यक्ति के संबंध में यदि कोई वास्तविक शिकायत है तो उसका समाधान कानूनी और तथ्यात्मक जांच के माध्यम से होना चाहिए, सोशल मीडिया पर फर्जी सामग्री फैलाकर नहीं।
“संत परंपरा को बदनाम करने का षड्यंत्र नहीं होगा सफल”
श्रीमहंत डॉक्टर रविंद्रपुरी महाराज ने स्पष्ट कहा कि संत समाज किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार से डरने वाला नहीं है। सनातन संस्कृति और अखाड़ों की गौरवशाली परंपरा को बदनाम करने की कोशिशों का तथ्य और सत्य के आधार पर जवाब दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कुंभ पर्व सनातन आस्था का विराट स्वरूप है और इसके प्रति समाज के प्रत्येक वर्ग को जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए।
अब सवाल केवल एक वायरल वीडियो का नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर AI और तकनीक के दुरुपयोग से पैदा होने वाले उस खतरे का है, जिसमें सत्य और फर्जी सामग्री के बीच अंतर करना आम व्यक्ति के लिए कठिन होता जा रहा है। ऐसे में जांच, तथ्य और सत्य ही सबसे बड़ा हथियार हैं।
