
– रितेश सैन
सामाजिक कार्यकर्ता
नजीबाबाद/बिजनौर।पर्यावरण संरक्षण के नाम पर आज बड़ी संख्या में लोग वृक्षारोपण अभियान चला रहे हैं, जो निश्चित रूप से एक सराहनीय प्रयास है। पेड़ लगाना आवश्यक है, लेकिन केवल वृक्षारोपण से ही पर्यावरण की सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।
आज पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पॉलिथीन और एकल-उपयोग प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग है। पॉलिथीन न केवल भूमि की उर्वरता को प्रभावित करती है, बल्कि नालियों को जाम करती है, जल स्रोतों को प्रदूषित करती है, पशुओं के जीवन के लिए खतरा बनती है और वर्षों तक नष्ट नहीं होती। इसके सूक्ष्म कण (माइक्रोप्लास्टिक) अब हमारे भोजन, पानी और शरीर तक पहुंच चुके हैं।
यदि हम वास्तव में पर्यावरण को सुरक्षित करना चाहते हैं, तो वृक्षारोपण के साथ-साथ पॉलिथीन के उपयोग को रोकने के लिए भी जनजागरण और ठोस प्रयास आवश्यक हैं। हमें स्वयं कपड़े या जूट के थैलों का उपयोग करना चाहिए, दूसरों को प्रेरित करना चाहिए और पॉलिथीन मुक्त समाज के निर्माण के लिए आवाज उठानी चाहिए।
पेड़ लगाना पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत है, लेकिन पॉलिथीन मुक्त जीवनशैली अपनाना उसकी वास्तविक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
