
*संतों का मूल उद्देश्य—समस्त मानवता का कल्याण और विश्व में शांति की स्थापना:महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती महाराज
हरि न्यूज
हरिद्वार। कुंभ नगरी हरिद्वार की पावन भूमि पर गंगा किनारे स्थित सिद्धपीठ आनंद वन समाधि के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती महाराज ने कहा कि संतों का जीवन सदैव देश, समाज और समस्त मानवता के कल्याण के लिए समर्पित रहता है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में संतों का स्थान अत्यंत ऊंचा माना गया है, क्योंकि वे निस्वार्थ भाव से समाज को सही दिशा देने का कार्य करते हैं।
महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती महाराज ने अपने संदेश में कहा कि संत केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त करने, नैतिक मूल्यों को स्थापित करने और लोगों को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने का कार्य भी करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संतों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि समाज में बढ़ती भौतिकता के कारण मानवीय मूल्यों में गिरावट देखने को मिल रही है।
उन्होंने आगे कहा कि संतों का कर्तव्य है कि वे समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचकर सेवा, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दें। संत समाज हमेशा से ही गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की सेवा में अग्रणी रहा है और आगे भी इसी प्रकार मानव कल्याण के कार्यों में जुटा रहेगा।
स्वामी रामानुज सरस्वती महाराज ने कहा कि आध्यात्मिकता ही जीवन को सही दिशा देती है और इससे व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे संतों के बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल बनाएं और समाज में प्रेम, शांति और सद्भाव का वातावरण स्थापित करने में सहयोग करें।
अंत में उन्होंने कहा कि संतों का मूल उद्देश्य केवल एक ही है—समस्त मानवता का कल्याण और विश्व में शांति की स्थापना।
