
हरि न्यूज
नारी तुम प्रेम हो आस्था हो विश्वास हो
नारी तुम अबला नहीं सबला हो,
अम्बर में चमकता सूरज, चाँद, सितारा हो।
नारी तुम प्रेम हो आस्था हो विश्वास हो,
टूटे हुए सपनों की सच्ची आस-विश्वास हो।
नारी तुम नफरती दुनियाँ में सच्चा प्यार हो,
उठो, जागो अपने शाश्वत अस्तित्व को जगालो ।
नारी तुम कभी मोम तो कभी धधकती आग हो,
कभी लहरों-सी, कभी गरजता तूफान हो।
नारी तुम कभी माँ कभी चंडी-दुर्गा हो,
तुम बच्चों का स्नेह-सागर त्याग की प्रतिमूर्ति हो।
रखो सबकी लाज हटादो अपना घूँघट,
नया युग है करलो तुम भी पूरी मन की बातl
कोई शक नहीं नारी तुम हो श्रद्धा की पावन पात्र,
चरण-कमल छूते हैं हम,
तुम छुओं सारा आकाश ।

लेखक:
(अब्दुल सलाम कुरेशी)
जिला- गुना (म.प्र.)
