
रचनाकार:अब्दुल सलाम कुरैशी
जिला-गुना,मध्यप्रदेश

हरि न्यूज
मैं मामा के घर न जाऊँगी
अबकी बार सावन में मम्मी,
मैं मामा के घर न जाऊँगी।
मामा के घर एक पेड़ नहीं हैं,
झूला झूलने किसके घर जाऊंगी।
पेड़ दूर-दूर तक नहीं दिखते,
बदरा भी कभी न छायें -आयें।
भीषण गरम व्यार है चलतीं,
ठण्डक भी कभी न मैं पाऊँ।
मामा बोले आजा बिटिया,
मामा ने तेरे एक पेड़ लगाया।
अगली बरस हम झूला डालेंगे,
तूझे झूला जरूर झुलायेंगे।
तभी तेरे मामा अगले बरस,
तेरी मम्मी से राखी बन्धबायेंगे।
आजा बिटिया अबकी बार,
हम हर घर पेड़ लगाने का मिशन चलायेंगे।
कोई पेड़ काटे न अबसे,
मानवता की खातिर मिशन चलायेंगे।
वृक्षों पर भी हम रक्षा सूत्र बांध,
रक्षाबंधन पुनीत पर्व मनायेंगे।