
त्याग,तपस्या और सेवा संस्कृति की प्रतिमूर्ति थे ब्रह्मलीन निराला स्वामी
-राजमाता आश भारती

हरि न्यूज
हरिद्वार, 9 जुलाई। गुरुपूर्णिमा के अवसर पर भूपतवाला स्थित निरांला धाम की परमाध्यक्ष राजमाता आशा भारती महाराज के संयोजन में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में संत समाज ने श्री नागेश्वर पीठाधीश्वर ब्रह्मलीन ब्रह्मऋषि संत निराला स्वामी लहरी बाबा महाराज, ब्रह्मलीन स्वामी कृष्णानंद महाराज एवं ब्रह्मलीन सुशीला माता का भावपूर्ण स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन निराला स्वामी लहरी बाबा का पूरा जीवन भगवान महादेव को समर्पित रहा। उन्होंने जीवन पर्यंत भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना करते हुए देश और धर्म की रक्षा की कामना की।

निराला धाम की परमाध्यक्ष राजमाता स्वामी आशा भारती महाराज ने ब्रह्मलीन दादा गुरु स्वामी कृष्णानंद महाराज, गुरु मां सुशीला माता एवं निराला धाम के ब्रह्मलीन परमाध्यक्ष निराला स्वामी लहरी बाबा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आस्था विश्वास समर्पण से ही सद्गुरु प्राप्त होते है। अपने सद्गुरुओं पर विश्वास करते हुए सत्य सनातन धर्म संस्कृति के पथ पर अग्रसर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन निराला स्वामी महाराज त्याग, तपस्या और सेवा संस्कृति की प्रतिमूर्ति थे। उनके द्वारा स्थापित सेवा परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।
राजमाता स्वामी आशा भारती महाराज के शिष्य स्वामी नित्यानन्द भारती ने सभी संत महापुरूषों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया और कहा कि भारतीय सनातन धर्म संस्कृति में गुरु का महत्वपूर्ण स्थान है। ्गुरु की सेवा से ही जीवन का कल्याण होता है। सभी को समर्पित भाव से गुरू की सेवा करनी चाहिए।
श्रद्धांजलि सभा का संचालन करते हुए स्वामी रविदेव शास्त्री ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी लहरी बाबा परम शिवभक्त और संत समाज की दिव्य विभूति थे। स्वामी आशा भारती महाराज वयोव्ृद्ध अवस्था में भी जिस प्रकार आश्रम के सेवा प्रकल्पों का संचालन कर रही हैं। वह सभी के लिए प्रेरणादायी है।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी चिदविलासानंद, स्वामी अनंतानंद गिरी, महंत दिनेश दास, महंत रविदेव शास्त्री, महंत कृष्णानंद, महंत केशवानंद, शिवम महंत, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी विनोद महाराज, स्वामी ज्योर्तिमयानंद, संत जगजीत सिंह, स्वामी श्याम प्रकाश, स्वामी शांतानंद सहित कई संत महंत व श्रद्धालु मौजूद रहे।
