
हरि न्यूज/भगवान दास शर्मा प्रशांत
इटावा।मुंबई जैसे व्यवसायिक शहर में जहां लगभग सभी राज्यों के लोग रहते है। उन पर जबरन मराठी भाषा थोपना और मारपीट करना ठीक नहीं है। मुम्बई में कुछ लोग मराठी के नाम पर गैर मराठियों को पीट रहे हैं झापड़ मार रहे हैं, गालियां दे रहे हैं। गैर मराठियों पर मराठी बोलने का दबाव बढ़ा रहे हैं। न बोल पाने वालों को अमानवीय यातनाओं से परेशान कर रहे हैं। यह देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन ही नही बल्कि राष्ट्र के संविधान का अपमान है। संविधान का अपमान राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में आता है।
राजनीति से जुड़े लोग अपने लाभ के लिए कितना नीचे गिर सकते हैं यह मुम्बई में देखा जा सकता है।
शिवसेना सहित गैर मराठा विरोधी सभी लोग उग्रवादी सोच के लोग हैं इनको अपनी सोच बदलनी चाहिये। लोग कहते हैं कि स्वयं ठाकरे परिवार ही मूल रूप से मराठी नही है यह मुझे पक्का नही पता। लेकिन जो हरकत ठाकरे परिवार कर रहा है वो देश की एकता और सौहार्द्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है। इसपर कड़ा कदम उठाया जाना चाहिये।
शिव सेना के लोगों ने बैंकों से हिंदी की तख्तियां उतार दिन और मराठी न बोलने वाले व्यक्ति के बहुत जोर से तमाचा भी मारा। ये हरकतें गैर मराठी भाषियों के भीतर आक्रोश और क्रोध भरेंगी। यह भी घातक होगा।
कहीं ऐसा न हो कि पूरे देश मे मराठी भाषियों के प्रति घृणा और विद्रोह पनप जाये तब स्थिति बहुत भयावह हो सकती है। देश की एकता और अखंडता के लिए भाषा विवाद खत्म होना चाहिए। हमें चाहिए कि हम सभी भाषाओं का सम्मान करें और जैसा कि हमारे संविधान में संविधान के अनुच्छेद 19 में विदित है कि हर भारतवासी को अपनी भाषा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। मुंबई जैसी घटनाएं सीधे तौर पर हमारे संविधान की आत्मा को भी आहत करती है।