
लोक कवि प्रेम बाबू प्रेमजी के हीरक जन्मोत्सव पर विश्व विख्यात साहित्यकारों, मनीषियों का हुआ अनूठा संगम,उनकी वर्षों की साहित्य साधना के फल स्वरूप दो पुस्तकों “प्रेमायण” और लोक गीतों पर आधारित “हूक उठे जियरा में” का हुआ लोकार्पण

भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’
हरि न्यूज संवाददाता
इटावा।उत्तर प्रदेश साहित्य सभा एवं पहल के तत्वावधान में लोक कवि प्रेमबाबू ‘प्रेमजी’ की हीरक जन्मोत्सव एवं डॉ राजीव राज की 50 वीं जन्मोत्सव पर शहर के तमाम गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में चहल पहल कोर्टयार्ड प्रांगड़ में संपन्न हुआ।जन्मोत्सव दो सत्रों में संचालित हुआ। प्रथम सत्र में प्रेम जी के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘प्रेमायण’ का विमोचन और उनके व्यक्तित्व कृतित्व पर चर्चा हुई। तो वही द्वितीय सत्र में भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। प्रथम सत्र में प्रेम जी की पुस्तक “प्रेमायण” का विमोचन युवा सांसद बदायूं श्री अंकुर यादव के कर कमलों से हुआ तो वही द्वितीय सत्र में दूसरी पुस्तक “हूक उठे जियरा में”का विमोचन सदर विधायक श्रीमती सरिता भदौरिया के कर कमलों से हुआ।
प्रथम सत्र में मंचासीन विद्वानों ने प्रेम बाबू प्रेम के साहित्यिक जीवन उनके व्यक्तित्व, कृतित्व पर चर्चा की। उपस्थित विद्वान डॉ विद्या कांत तिवारी, वरिष्ठ साहित्यकार अशोक यादव, संस्कृत प्राचार्य डॉ महेश तिवारी,डॉ. पद्म सिंह पदम आदि ने अपने विचार एवं अनुभव साझा किए। प्रथम सत्र का संचालन डॉ. कुश चतुर्वेदी जी ने तो वही द्वितीय सत्र का संचालन कवि डॉ प्रवीण शुक्ला ने किया। द्वितीय सत्र भव्य कवि सम्मेलन के रंग में डूबा रहा। जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कवि कवयित्रियों ने अपने काव्य पाठ से समा बांध दी। शायरा शबीना अदीब की पंक्तियों “फाफ” पर रचना सुनकर भाव विभोर कर दिया तो वही कवयित्री कीर्ति काले की रचना ” फाफ” ने श्रोताओं के मन पर गहरी छाप छोड़ी। ओज की विश्वविख्यात कवयित्री कविता तिवारी ने ” से” सुनाकर सम्मेलन को ऊंचाइयों पर पहुंचाया तो वही डॉ सोनरूपा विशाल ने ” मेरे दोनों छोर पिता” सुनकर सभी को भावुक कर दिया। आगरा की कवयित्री भूमिका जैन ने “तुम गंगा का जल बन जाना” सुनकर लोगों के दिल में जगह बनाई। वही सुविख्यात कवियों में गीतकार, डॉ विष्णु सक्सेना, डॉ सुरेश अवस्थी, डॉ प्रवीण शुक्ला, उसके बाद बाराबंकी से आए लोकप्रिय गीतकार प्रियांशु गजेंद्र ने अपना गीत “गुड़हल और बबूलों के दिन, पी.के.आज़ाद, बलराम श्रीवास्तव ने अपने काव्य पाठ से सबका मन मोह लिया।
सुपुत्र गीतकार डॉ राजीवराज ने कहा कि यमुना के तट पर लगा साहित्यकारों का ये अनूठा संगम लोक कवि प्रेमजी की वर्षों की साहित्य साधना का प्रमाण है जो अनंत काल तक आने वाले नवाँकुरों को साहित्य के क्षेत्र में कुछ करने के लिए प्रेरित करता रहेगा। इस अवसर पर जिला पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव , पूर्व सांसद रघुराज सिंह शाक्य, अनिता यादव . शैलेंद्र शर्मा, प्रो.रमाकांत राय, शिक्षाविद् कैलाश यादव, डॉ आनंद, पूर्व ब्लॉक प्रमुख कमलेश, राधेश्याम शाक्य, श्याम पाल, श्रीराम राही, दीप चंद निर्मल, साबिर अली, अनिल दीक्षित आदि सम्मिलित रहे।
