आस्था के सागर में डूबा टीएमयू का रिद्धि-सिद्धि भवन

उत्तर प्रदेश

हरि न्यूज

मुरादाबाद।पर्वाधिराज दशलक्षण महामहोत्सव पर तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद में उत्तम मार्दव के दिन रिद्धि-सिद्धि भवन में आस्था की बयार बही। उत्तम मार्दव धर्म पर नवदेवता पूजन, सोलहकारण पूजन और दशलक्षण पूजा हुई। नंदीश्वर द्वीप पूजन का अर्घ्य भी चढ़ाया। प्रतिष्ठाचार्य श्री ऋषभ जैन शास्त्री के सानिध्य में विधि-विधान से हुए धार्मिक अनुष्ठानों में कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, फर्स्ट लेडी श्रीमती वीना जैन, जीवीसी श्री मनीष जैन, श्रीमती ऋचा जैन, श्री अक्षत जैन, श्रीमती जाह्नवी जैन आदि की गरिमामयी मौजूदगी रही। प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक का सौभाग्य श्री पर्व जैन को मिला। जीवीसी श्री मनीष जैन ने स्वर्ण कलश से अभिषेक और शांतिधारा करने वालों को सम्मानित किया। ईडी श्री अक्षत जैन ने द्वितीय कलश से अभिषेक और शांतिधारा वालों को, जबकि श्रीमती जाह्नवी जैन ने अष्ट कुमारियों को सम्मानित किया। अष्ट कुमारी का सौभाग्य गुणिका जैन, सिमी जैन, आयुषी जैन, समीक्षा जैन, कुमकुम जैन, झलक जैन, रिया जैन, मान्या जैन को मिला। भोपाल के सचिन जैन एंड पार्टी के भक्तिमय गीतों पर श्रावक-श्राविकाएं भक्ति में झूम उठे।

द्वितीय स्वर्ण कलश से श्री दृश्य जैन, तृतीय स्वर्ण कलश से श्री अक्षत जैन, चतुर्थ स्वर्ण कलश से श्री आयुष जैन को अभिषेक करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। प्रथम स्वर्ण शांतिधारा का सौभाग्य श्री हर्ष मोदी, श्री सुरेंद्र जैन, श्री काव्य जैन, श्री उत्कर्ष जैन, श्री अनंत जैन, श्री कृष जैन, श्री संस्कार जैन, श्री कृष्णा जैन को मिला। द्वितीय रजत शांतिधारा का पुण्य श्री मयंक जैन, श्री उत्कर्ष जैन, श्री वीर जैन, श्री हर्ष जैन, श्री रोमिल जैन, श्री अक्षत जैन, श्री अर्पण जैन, श्री अंसत जैन, श्री स्नेहशु जैन ने कमाया। रिद्धि-सिद्धि भवन में शास्त्री जी ने श्रावक-श्राविकाओं को बताया, आचार्य जयसेन स्वामी ने प्रतिष्ठा पाठ में लिखा है कि भगवान का आह्वान कैसे किया जाए और स्थापना कैसे की जाए। प्रतिष्ठाचार्य ने अर्घ्य का मतलब भी बताया। वह बोले, संसार में किसी बात का अभिमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि सब नश्वर है। विद्या ददाति विनयम श्लोक के माध्यम से विनय की महत्ता बताई। आज का नियम याद दिलाते हुए बताया, कल तक दर्पण नहीं देखना है।

दूसरी ओर दिव्यघोष के बीच संध्या आरती जिनालय से रिद्धि-सिद्धि भवन तक लाई गयी। यह आरती लाने का सौभाग्य एफओई के डीन प्रो. आरके द्विवेदी और जैन स्टुडेंट्स को मिला। रिद्धि-सिद्धि में पंच परमेष्ठी और आदिनाथ भगवान की आरती की हुई। अंशिका जैन और परी मोदी जैन ने भक्तांबर पाठ का वाचन किया। सीसीएसआईटी के स्टुडेंट्स की ओर से सांस्कृतिक संध्या पर ऑडी में मोक्ष के प्रेमी नाटक के जरिए आध्यात्मिक सार को समझाया। इसके तहत अकलंक-निकलंक आचार्य, तुमाल मुनि की कथा और पांडव वैराग्य की कथा का मंथन किया। नाटक के जरिए स्टुडेंट्स ने बताया, ऋषि और प्रबुद्ध आत्माएं, असीम संयम और क्षमा के जरिए मोक्ष की खोज में सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठ जाते हैं। आध्यात्मिक आनंद का सफर नृत्य के जरिए आध्यात्मिक जागृति और आंतरिक शांति से उत्पन्न होने वाले शाश्वत आनंद को खूबसूरती से चित्रित किया। प्रस्तुतियों के जरिए स्टुडेंट्स ने बताया, क्षमा ही वीरों का सच्चा आभूषण है। यह एक ऐसा गुण जो क्षमा करने वाले और क्षमा पाने वाले दोनों का उत्थान करता है। दैनिक जीवन में उत्तम क्षमा का अभ्यास करना आवश्यक है। आध्यात्मिक विकास करुणा से शुरू होता है। कार्यक्रम का समापन पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ। संचालन सांस्कृतिक समन्वयक प्रो. आदित्य जैन ने किया। महोत्सव में वीसी प्रो. वीके जैन, ब्रहमचारिणी दीदी डॉ. कल्पना जैन, डॉ. करुणा जैन, श्री मनोज जैन, प्रो. निशीथ मिश्रा, श्री विपिन जैन, डॉ. रवि जैन, डॉ. विनोद जैन, डॉ. आशीष सिंघई, डॉ. एसके जैन, डॉ. अक्षय जैन, डॉ. रत्नेश जैन, डॉ. अर्चना जैन, श्रीमती अहिंसा जैन, श्रीमती मोनिका जैन, श्रीमती स्वाति जैन, डॉ. विनीता जैन, श्रीमती निकिता जैन, श्रीमती अंजलि सिंघई, श्रीमती आरती जैन उपस्थित रहे।

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