
हरि न्यूज
मुम्बई।पवई, मुंबई, महाराष्ट्र -अभी कुछ ही महीनों पहले अवतरित हुआ, सोच पब्लिकेशन हाउस अपनी ऊर्जा और नवीनता से साहित्यिक जगत में एक नई लहर पैदा कर रहा है। यह प्रकाशन गृह, जो आपकी सोच को उड़ान देने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, ने अल्प समय में ही एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है।महज २-३ महीनों के भीतर, सोच पब्लिकेशन हाउस ने दो उत्कृष्ट सोलो पुस्तकें और सात से आठ प्रेरणादायक संकलनों का प्रकाशन कर दिखाया है। जिसमें कवि अविनाश कुमार साह जी की संकलन “स्वराज के दीवाने” भी अभी -अभी प्रकाशित हुई हैं | जिसमें पलक अग्रवाल ,त्रिशिका श्रीवास्तव, महेंद्र गर्ग ‘रंगरसिया’ ,आदर्श कुमार वार्ष्णेय ,एकता चतुवेर्दी ,रीतेश मिश्रा ,डॉ प्रतिभा चौहान, प्रथमेश सक्सैना ,डॉ. नूथी अभिलाष, नेहा वार्ष्णेय “धारा”, पूजा त्रेहन कादम्बरी गुप्ता, डॉ. गणपत श्रीपतराव माने, दिव्यांजली वर्मा ,प्रियंका सिंह ,सत्या सुरेंद्र, कुसुम रानी सिंघल, प्रोफेसर स्मिता शंकर, मिनाक्षी टेलर ,किरण “काव्य किरण” ,आकांक्षा रैकवार , रजनी शर्मा ‘नाम्या’, पंकज त्यागी ,प्रतिभा पांडे ‘प्रति’ ,अमन रंगेला ,रजत दीक्षित “रजत” ,महेंद्र कुमार मिठारवाल, प्रशांत तिवारी, प्रियंका थपलियाल ,राजकुमार प्रस्बी , उज्जवल कुमार श्रीवास्तव ,डॉ. मोहिनी ‘स्नेह’ ,दिग्विजय भोई, रीना कुमारी ,किरण बाला, मुक्ता गिल, मंजू पाल, डॉ. तरूण राय कागा, डॉ. कर्नल आदि शंकर मिश्र ,भास्कर सिंह माणिक, भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’, मुकेश सुरेश रूणवाल ,वृंदा “वाणी” ,डॉ. कामाक्षी शर्मा ‘कमल’, कविता चौधरी ,प्रियंका कामथ, फ़ैज़ा फैज़ल , वर्तिका श्रीवास्तव ,कशवी डालमिया, पारुल जैन ,इंदिरा चक्रवर्ती का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा |सोच पब्लिकेशन हाउस सिर्फ़ पुस्तकें प्रकाशित करने वाला संस्थान नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है जहाँ विचारों को सम्मान मिलता है, कल्पनाओं को पंख लगते हैं और लेखकों के सपनों को साकार किया जाता है। यह एक ऐसा आंदोलन है जो हर उस आवाज़ को बुलंद करने के लिए प्रतिबद्ध है जिसमें कुछ कहने, कुछ बदलने और कुछ नया रचने का जज़्बा है। “स्वराज के दीवाने” पुस्तक भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों की वीरगाथा को उजागर करती है, जिनके त्याग, साहस और बलिदान ने देश को आज़ादी दिलाई। पुस्तक का मूल उद्देश्य पाठकों को देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत करना और उन्हें हमारे स्वाधीनता संग्राम के गौरवशाली इतिहास से अवगत कराना तो हैं ही साथ ही साथ आज के युवा पीढ़ी को आज़ादी के मतवालों से रूबरू करवाना है ,जिसे ये लोग भूलते जा रहे हैं |यह पुस्तक युवाओं को यह समझाने का प्रयास करती है कि असली शक्ति न सिर्फ हथियारों में, बल्कि विचारों, संकल्प और निष्ठा में होती है। यह पुस्तक न केवल इतिहास को जानने का माध्यम है, बल्कि वर्तमान को बेहतर बनाने की प्रेरणा भी देती है।
“जय हिन्द, जय भारत”