
*30 अक्टूबर को दक्षेश्वर महादेव कनखल में प्रातःकाल रुद्राभिषेक के पश्चात होगा यात्रा का शुभारम्भ, 31 अक्टूबर को मां गंगा की सेवा के तहत चलेगा स्वच्छता अभियान एवं हरकी पैड़ी पर गंगा आरती कर दिया जायेगा सनातन संस्कृति के प्रति जनजागरण का संदेश
हरि न्यूज
हरिद्वार, 27 अक्टूबर। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक एवं मिश्री मठ के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी शंकर करौली महादेव महाराज ने कहा कि राष्ट्र की एकता, अखण्डता की अक्षुण्णता, सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन व मां गंगाजी की स्वच्छता के संकल्प के साथ दिव्य साधना से परिपूर्ण भव्य दंडवत यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इस यात्रा के माध्यम से कुंभ मेले को दिव्य एवं भव्य बनाने, मां गंगा की स्वच्छता और सेवा के प्रति लोगों को जागरूक करने तथा आने वाली पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

दंडवत यात्रा के संदर्भ में जानकारी देते हुए महामंडलेश्वर स्वामी शंकर करौली महादेव महाराज ने बताया कि दंडवत यात्रा का शुभारंभ 30 अक्टूबर को भगवान दक्षेश्वर महादेव का विधि-विधान से रुद्राभिषेक करने के पश्चात किया जाएगा। उन्होंने बताया कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यात्रा की शुरुआत नया अखाड़ा उदासीन कनखल से की जाएगी। रुद्राभिषेक के बाद साधक भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर सनातन धर्म की परंपराओं और मां गंगा की सेवा का संकल्प लेते हुए 5000 साधक दंडवत यात्रा में शामिल होंगे इसके साथ ही लगभग 1000 स्वयंसेवक यात्रा का व्यवस्थित बनाने में अपना योगदान दंेगे। साथ ही हजारों श्रद्धालु व भक्तजन दंडवत यात्रा के साथ पदयात्रा करंेगे।
उन्होंने बताया कि 31 अक्टूबर को मां गंगा सेवा अभियान में संस्था के हजारों स्वयंसेवक गंगा स्वच्छता और गंगा संरक्षण का संदेश देते हुए विशेष सफाई अभियान चलायेंगे। दंडवत यात्रा व गंगा सेवा अभियान से यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को आध्यात्मिक चेतना, सेवा, स्वच्छता और संस्कारों के महत्व से जोड़ना भी है। इसके साथ ही सायंकाल मां गंगा की आरती कर देश में सनातन धर्म एवं संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया जाएगा।
महामंडलेश्वर स्वामी शंकर करौली महादेव महाराज ने कहा कि मां गंगा भारतीय संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक परंपरा की प्रमुख आधारशिला हैं। गंगा की निर्मलता बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि गंगा में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए जनसहभागिता के माध्यम से स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। इसी भावना से उन्होंने अपने साधकों के साथ मां गंगा की सेवा करने और स्वच्छता अभियान में योगदान देने का संकल्प लिया है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों का वास्तविक महत्व तभी सार्थक होता है, जब उनसे समाज में सेवा, सद्भाव और जिम्मेदारी की भावना मजबूत हो। दंडवत यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया जाएगा कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों और पवित्र नदियों की रक्षा करना भी हमारा कर्तव्य है।
उन्हांेने कहा कि यात्रा के माध्यम से सनातन धर्म की परंपराओं, आध्यात्मिक साधना और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से परिचित कराना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि कुंभ मेला केवल धार्मिक आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संत परंपरा और आध्यात्मिक एकता का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। कुंभ को दिव्य एवं भव्य स्वरूप देने के लिए श्रद्धालुओं और समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। दंडवत यात्रा के माध्यम से कुंभ मेले की महत्ता, मां गंगा के संरक्षण और सनातन संस्कृति के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
महामंडलेश्वर स्वामी शंकर करौली महादेव महाराज ने कहा कि संत समाज का दायित्व है कि वह आध्यात्मिक मार्गदर्शन के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर भी लोगों को प्रेरित करे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह दंडवत यात्रा श्रद्धालुओं में भक्ति, सेवा और सांस्कृतिक चेतना की भावना को मजबूत करने में सहायक होगी।
मिश्री मठ के प्रबंधक डा. उमेश सचान ने बताया कि दंडवत यात्रा में मिश्री मठ के एक हजार स्वयंसेवक व्यवस्था बनाने में सहयोग करेंगे तथा श्रद्धालुओं की सेवा में चार एम्बुलेंस साथ चलेगी, जिससे यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके व यातायात व्यवस्था सुचारू रहें।



