
*सनातन का सबसे बड़ा पर्व है कुंभ: महामंडलेश्वर करौली शंकर
*कुंभ की तैयारियों और संत समाज की एकजुटता पर निरंजनी अखाड़े में प्रमुख संतों की बैठक
हरि न्यूज
हरिद्वार।कुंभ मेला 2027 को दिव्य और भव्य स्वरूप में संपन्न कराने के लिए संत समाज ने एकजुट होकर तैयारियों को गति देने पर जोर दिया है। निरंजनी अखाड़े में प्रमुख संतों की मुलाकात के दौरान कुंभ की व्यवस्थाओं, अखाड़ों के आपसी समन्वय और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि सभी अखाड़ों और संतों को साथ लेकर चलना ही उनका लक्ष्य है। सभी अखाड़ों के सहयोग से हरिद्वार कुंभ को भव्य स्वरूप में संपन्न कराया जाएगा।
श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के महामंडलेश्वर स्वामी शंकर करौली,वैष्णव मंडल के अध्यक्ष बाबा हठयोगी, भारत साधु समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष स्वामी ऋषिश्वरानंद और स्वामी आशुतोष महाराज सहित कई प्रमुख संतों ने निरंजनी अखाड़ा पहुंचकर श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज से भेंट की। इस दौरान आगामी कुंभ मेले को लेकर लंबी चर्चा हुई। श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने मां मनसा देवी का चित्र भेंटकर, पगड़ी पहनाकर और चुनरी ओढ़ाकर संतों का स्वागत किया।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ को जिस तरह सभी अखाड़ों ने मिलकर सफल बनाया, उसी तरह हरिद्वार कुंभ भी संत समाज की एकजुटता और सहयोग से दिव्य-भव्य स्वरूप में संपन्न होगा। केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की धामी सरकार कुंभ मेले को भव्य बनाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही हैं। कुंभ में आने वाले अखाड़ों के संत-महापुरुषों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, आस्था और संत समाज की एकता का विराट प्रतीक है।
महामंडलेश्वर स्वामी करौली शंकर ने कहा कि कुंभ मेला सनातन धर्म का सबसे बड़ा पर्व है। गंगा तट पर संतों का विशाल संगम और संत-महापुरुषों के दिव्य प्रवचन पूरे विश्व को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी अखाड़े एकजुट होकर हरिद्वार कुंभ मेले को सफलतापूर्वक संपन्न कराएंगे।
बाबा हठयोगी और स्वामी ऋषिश्वरानंद महाराज ने कहा कि श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज की सभी को साथ लेकर चलने की कार्यशैली सराहनीय है। संत समाज उनके प्रयासों की प्रशंसा करता है। उन्होंने कुंभ मेले की सफलता के लिए संतों के बीच आपसी समन्वय और सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।



