
लेखक-*(हाइकुकार)*
अब्दुल सलाम कुरैशी
जिला-गुना (म.प्र.)
*नवरात्रि छठवाँ दिवस* *माँ कात्यायनी*(हाइकु विधा)
(1) कात्यायनी का
उदय हुआ तप
कात्यायन के।
(2) माँ कात्यायनी
देवी दुर्गा का रूप
सिंह सवार।
(3) महिषासुर
शत्रु का बध किया
असि है हस्त।
(4) असि-कमल
धारण किये हाथ
शत्रु पे घात।
(5) परिग्रहण
बुद्धि-प्रेम- बाधाएँ
हरती माता।
(6) ब्रज गोपियाँ
पूजतीं कात्यायनी
कृष्ण को पाने।
( 7) लाल चुनरी
फल-फूल शहद
माता को भाते।
(8) शिव पति हैं
गौरी – काली -भवानी
नाम अनेक ।
(9) सिंह सवारी
महिषासुर वध
अस्त्र खड्ग है।
(10) पुनीत भाव
पूजा अर्चना करें
माँ कत्यायनी ।



