
हरि न्यूज
हरिद्वार। भारत माता मंदिर के महंत एवं पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने कहा कि सनातन केवल एक धर्म नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जीवन को दिशा देने वाली शाश्वत संस्कृति और जीवन पद्धति है। यह मानव को सत्य, सेवा, करुणा, कर्तव्य और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सनातन के सिद्धांतों को केवल सुनने या उन पर चर्चा करने से अधिक आवश्यक है कि उन्हें अपने दैनिक जीवन में व्यवहारिक रूप से अपनाया जाए।
स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति मनुष्य को सत्य बोलने, धर्म का पालन करने, माता-पिता, गुरु एवं बड़ों का सम्मान करने, जरूरतमंदों की सेवा करने तथा प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करने की प्रेरणा देती है। यही वे जीवन मूल्य हैं, जिनके कारण भारतीय संस्कृति विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति के विचार, व्यवहार और कर्म धर्म के अनुरूप होते हैं, तभी परिवार में सुख-शांति, समाज में समरसता और राष्ट्र में समृद्धि का वातावरण बनता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में नैतिक मूल्यों और संस्कारों को अपनाए, तो अनेक सामाजिक समस्याओं का समाधान स्वतः संभव हो सकता है।
महामंडलेश्वर ने कहा कि सनातन धर्म का मूल संदेश मानवता, सहिष्णुता, प्रेम और सेवा है। यह किसी के प्रति वैमनस्य नहीं, बल्कि सभी प्राणियों के कल्याण की भावना का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से आह्वान किया कि वे आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़े रहें और भारतीय परंपराओं एवं संस्कारों का संरक्षण करें।
उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि “धर्मो रक्षति रक्षितः”, अर्थात जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। यह केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत सिद्धांत है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति को आत्मसात करना चाहिए।
स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने कहा कि प्रत्येक भारतीय को अपने संस्कारों, संस्कृति और सनातन परंपरा पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि आने वाली पीढ़ियों को सनातन धर्म की अमूल्य विरासत, उसके आदर्शों और जीवन मूल्यों से परिचित कराना हम सभी का दायित्व है। यदि नई पीढ़ी अपने धर्म, संस्कृति और संस्कारों से जुड़ी रहेगी, तो भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान सदैव अक्षुण्ण बनी रहेगी।
