
*पग-पग पर हमें साहस जुटाते,हमारे पिताजी*

लेखक:(अब्दुल सलाम कुरैशी)
जिला -गुना (म. प्र.)
पग-पग पर हमें साहस जुटाते,
हमारे पिताजी l
उन्नति का पथ दिखलाते,
हमारे पिताजी ।
खुशियों का दर्शन बन जाते
हैं,
सत्य का आईना दिखाते l
हमारे पिताजी।
करो इनकी देखभाल हमेशा प्रभु समझकर,
वारा था सारा प्यार हमें नन्हा फरिश्ता समझकर ।
देते हैं सलाह नित्य शिष्टाचार की हमें,
बनजाते हैं वे हमारी जिंदगी
का तर्जुबा ।
रखो सदा प्रसन्न इन्हें पाओ ढेरों आशीष हमेशा,
न जाने प्रभु के किस रूप में मिले हैं,
हमें पिताजी ।
पितृ दिवस पर आओ करें हम सब प्रतिज्ञा,
जीते जी करेंगे सदा सम्मान हम,
हमारे पिताजी ।
