
हरि न्यूज
हरिद्वार।गुरुकुल काँगड़ी समविश्वविद्यालय के 123 वें वार्षिकोत्सव ‘प्रोत्साहन’ के दूसरे दिन एआई-ड्रिवन नेक्स्ट जेनरेशन डिजिटल फॉरेंसिक्स: ट्रेंड्स, रिसर्च एंड एडवांसेज इन क्रिमिनल एविडेंस (TRACE-26) विषय पर अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया।उद्घाटन सत्र का शुभारम्भ वन्दे मातरम एवं कुलगीत गायन से आरम्भ हुआ ।समविश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि हरिद्वार जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य ने कहा कि डिजिटल समय में अपराध की प्रवृत्ति और पैटर्न में बदलाव आया है जिससे उपजी चुनौतियों से निबटने के लिए डिजिटल फोरेंसिक और एआई टूल्स एक महत्वपूर्व भूमिका निभा सकते हैं, इससे साक्ष्य संकलन और न्याय व्यवस्था में अभियोजन पक्ष को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जन सामान्य के लिए न्याय प्रणाली को सरल व सहज बनाया जा सकता है।मनोज आर्य ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि एआई का उपयोग समय की आवश्यकता है लेकिन युवाओं को इसकी निर्भरता से भी सावधान रहना होगा।

अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि फोरेंसिक साइंस लैब, हैदराबाद के पूर्व निदेशक और विख्यात फोरेंसिक विशेषज्ञ के.एम. वार्ष्णेय ने अपने वक्तव्य में कहा कि साक्ष्य को सच में बदलना ही फोरेंसिक साइंस है।भारत में फोरेंसिक साइंस का विषय प्रतिष्ठित एवं पुरातन से जुड़ा हुआ है जिसमे रामायण तथा महाभारत कालीन घटनाओं में इसकी प्रमाणिकता सिद्ध होती है।उन्होंने कहा कि नई न्याय संहिता लागू होने से गंभीर अपराधों की आपराधिक जांच में फोरेंसिक जांच को अनिवार्य कर दिया गया है जिसके चलते देश को बड़ी संख्या में फोरेंसिक साइंस विशेषज्ञों की जरूरत महसूस हो रही है इसलिए यह युवा पीढ़ी के लिए कैरियर की दृष्टि से एक बड़ा साधन बनकर उभरा है जिसके लिए समुचित प्रयास किया जाना जरुरी है।के.एम. वार्ष्णेय ने कहा कि एआई के उपयोग से फोरेंसिक साइंस और आपराधिक जांच में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए है और न्याय प्रणाली सुद्रढ़ हुयी है।
समविश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एस.के. आर्य का लिखित शुभकामना संदेश प्रतिभागियों के समक्ष प्रस्तुत किया।इसके उपरांत अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने कहा कि डिजिटल फोरेंसिक में एआई के प्रयोग से अनेक अनसुलझे केस को निस्तारित करने में मदद मिली है जिसमें अपराधिक प्रवृति से जुड़े लोगों को दण्डित भी किया गया है। उन्होंने युवा पीढ़ी को इस विषय में परांगत बनाने के उद्देश्य से शिक्षण संस्थाओं में फोरेंसिक साइंस को अनिवार्य विषय बनाये जाने की वकालत की।कार्यक्रम में भेषज विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. सत्येन्द्र कुमार राजपूत ने अंतर्राष्टीय संगोष्टी का विषय प्रवर्तन प्रस्तुत करते हुए अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी के उद्देश्यों और विभिन्न देशों से जुड़े प्रतिभागियों के बारे में जानकारी प्रस्तुत की।इससे पूर्व स्वागत वक्तव्य में समविश्वविद्यालय के डायरेक्टर,शोध एवं विकास डॉ. सुहास ने समविश्वविद्यालय में शोध के क्षेत्र में किये जा रहे विकासात्मक कार्यों पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र में संपन्न हुए कार्यक्रमों का संचालन डॉ. कल्पना सागर ने किया।
इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार, मुख्य संयोजक प्रो. प्रभात कुमार, वित्ताधिकारी प्रो. वी के सिंह , निदेशक आईक्यूएसी प्रो. पंकज मदान मुख्य संयोजक, उप कुलसचिव डॉ. श्वेतांक आर्य, प्रो. मनुदेव बंधु, प्रो. एल पी पुरोहित, डॉ करतार सिंह, समाजसेवी के.के. चांदवानी, पार्षद नागेन्द्र राणा, प्रो दिनेश चन्द्र शास्त्री, प्रो कर्मजीत भाटिया, डॉ राजकुमार भाटिया, डॉ महेंद्र असवाल, डॉ विपुल भट्ट, प्रो राकेश कुमार, प्रो नमिता जोशी, प्रो सुरेखा राणा, डॉ संगीता मदान, डॉ ऋचा सैनी, डॉ ऋतू अरोरा, डॉ वीरेंदर विर्क, डॉ नेहा कौशिक, डॉ मीरा त्यागी, डॉ आशिमा गर्ग, डॉ पंकज कुमार पाल, डॉ. आभा शुक्ला, डॉ ममता यादव, डॉ सरिता नेगी, डॉ मनीला, डॉ निशि हांडा, डॉ बिंदु मलिक, डॉ दीपा गुप्ता, डॉ बबिता शर्मा, डॉ बबलू, डॉ भारत, डॉ मंजूषा कौशिक, डॉ सुनीता, डॉ नेहा बत्रा, डॉ पूनम पैन्युली, रमेश, डॉ. धर्मेन्द्र बालियान, डॉ भगवान दास, रजनीश भारद्वाज, नरेन्द्र मलिक, दीपक वर्मा, डॉ संदीप, डॉ राकेश भुटीयानी, डॉ हरेंद्र मलिक, डॉ कृष्ण कुमार, डॉ दिलीप कुशवाहा, डॉ हरेन्द्र मलिक, डॉ संगीता मदान, डॉ गगन माटा, दीपक, रणजीत सिंह, विजय प्रताप सिंह, डॉ शिव कुमार चौहान, डॉ अनिल डंगवाल, कुलभूषण शर्मा, हेमंत सिंह नेगी, नीरज भट्ट, नीरज बिडला, किशन कुमार, रुपेश पन्त, वीरेंद्र पटवाल, सुधाकर, डॉ मयंक पोखरियाल, राजीव गुप्ता उपस्थित रहे।
अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में उपस्थित अतिथ्यों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार द्वारा किया गया।
एप्लीकेशन ऑफ़ बार कोडिंग इन फोरेंसिक साइंस विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित
इम्पीरियल कॉलेज, लन्दन के वैज्ञानिक डॉ. सत्य प्रकाश ने एप्लीकेशन ऑफ़ बार कोडिंग इन फोरेंसिक साइंस विषय अपना विशेषज्ञ व्याख्यान अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में ऑनलाइन प्रदान किया| डॉ. सत्य प्रकाश ने अपने व्याख्यान में बताया कि किस प्रकार डीएनए कोडिंग के माध्यम से वास्तविक अपराधी को चिन्हित किया जा सकता है।डॉ. सत्य प्रकाश ने बार कोडिंग के विभिन्न प्रयोगों से प्रतिभागियों को अवगत कराते हुए बताया कि फोरेंसिक साइंस और जेनेटिक्स के समन्वय से जटिल अपराधों की जांच में न केवल तेजी लाई जा सकती है बल्कि उन्हें शीघ्रता से सुलझाया जा सकता है।ऑनलाइन माध्यम से न्यूजीलेंड, यू.ए.ई, नेपाल आदि से 10 विषय विशेषज्ञों ने फोरेंसिक साइंस की विभिन्न विधाओं पर अपने शोध प्रस्तुत किये।
वैज्ञानिक सत्रों में समापन वक्तव्य पद्मश्री डॉ बी.के. संजय, डायरेक्टर, एम्स गुवाहाटी ने प्रस्तुत किया।भारत के महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, नार्थ ईस्ट, गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्यों के विशेषज्ञों एवं शोध छात्रों ने ऑनलाइन ऑफलाइन तथा पोस्टरों के माध्यम से लगभग 350 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी पर २१ कुंडीय यज्ञ का आयोजन
गुरुकुल काँगड़ी समविश्वविद्यालय के 123 वें वार्षिकोत्सव ‘प्रोत्साहन’ के दूसरे दिन एआई-ड्रिवन नेक्स्ट जेनरेशन डिजिटल फॉरेंसिक्स: ट्रेंड्स, रिसर्च एंड एडवांसेज इन क्रिमिनल एविडेंस (TRACE-26) विषयक अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी के आयोजन के अवसर पर विश्वविद्यालय सभागार परिसर में 21 कुंडीय यज्ञ का आयोजन किया गया| डॉ. दीनदयाल और डॉ. वेदव्रत के संयुक्त संयोजन में यज्ञ का आयोजन हुआ जिसमे संगोष्ठी के मुख्य अतिथि हरिद्वार जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य एवं विशिष्ट अतिथि फोरेंसिक साइंस लैब, हैदराबाद के पूर्व निदेशक के एम वार्ष्णेय सहित कुलसचिव, कुलपति, वित्ताधिकारी आदि पदाधिकारियों ने प्रतिभाग किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं वृक्षारोपण
अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी के वैज्ञानिक सत्रों के उपरांत लोक परम्पराओं से जुड़े हुए कार्यक्रमों में लोक गीत, गिद्दा, भांगड़ा, योग प्रदर्शन, लघु नाटिका जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्र एवं छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, कार्यक्रम के अंत में अतिथियों द्वारा अनेक औषधीय पौधों का रोपण किया गया।इस अवसर पर सभागार परिसर में लगे विभिन्न स्टॉलों पर अतिथियों एवं प्रतिभागियों द्वारा अवलोकन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न आर्यासमाजों से जुड़े पदाधिकार्यों एवं गणमान्य लोगों को स्मृति चिन्ह के रूप में यजुर्वेद भाष्य प्रदान कर सम्मानित किया गया।
प्रमुख आकर्षण
■ गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के 123 वें वार्षिकोत्सव ‘प्रोत्साहन’ में योग विभाग, मुख्य परिसर के छात्रों एवं कन्या गुरुकुल देहरादून की छात्राओं द्वारा जटिल योग आसनों की संगीतमयी प्रस्तुति दी गयी। इस योग प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ. योगेश्वर दत्त, डॉ. राजीव शर्मा डॉ. संदीप,डॉ. मनोज,डॉ. अंकित सैनी, डॉ. संयोगिता के निर्देशन में योग प्रस्तुतियां तैयार की गयी।
■ स्वामी श्रद्धानन्द का राष्ट्र निर्माण में योगदान पर सम्भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतिभागियों ने स्वामी श्रद्धानंद के जीवन के विविध पक्षों और उनके अवदान पर सम्भाषण के माध्यम से प्रस्तुत किया।
■ कन्या गुरुकुल परिसर की छात्राओं के द्वारा स्वामी दयानन्द और स्वामी श्रद्धानंद के जीवन पर आधारित लघु नाटिका का प्रदर्शन किया गया।
■ कवि सम्मेलन में युवा कवियों ने बांधा समां
गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के वार्षिकोत्सव में आयोजित कवि सम्मेलन में युवा कवियों ने अपने काव्य पाठ के द्वारा दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ.मोहित संगम, डॉ.प्रशांत कौशिक, अविनाश कुमार, गरिमा दीक्षित,शगुन जौहरी,प्रगति मिश्रा,राघव कुमार आदि युवा कवि-कवयित्रियों ने अपनी राष्ट्रीयता की भावनाओं से ओतप्रोत कविताओं का पाठ किया।
