
लेखक:अब्दुल सलाम कुरैशी
*हे ऋतु राज बसंत तुम्हारा स्वागत*
हरि न्यूज
प्रकृति- मानव- खग -नदियां,
सब भूल गई थी मुस्कुराना।
हुआ नव संचार ऋतु राज तेरा आना,
तेरे आने मात्र से चेहरे सब खिलखिला उठे,
हे ऋतु राज बसंत तुम्हारा स्वागत है।
नव-पल्लव नव- सुमन हर्षित हो डोल रहे हैं,
चहुं दिशा मैं शीतल वयार- रसाल -बौर रहे हैं।
भंवरे फूलों के कानों में मकरंद घोल रहे हैं।
प्रकृति का चप्पा -चप्पा हर्षित होकर,
माया- जाल में तुम्हारे सुध- बुध खो रहे हैं।
है ऋतुराज बसंत तुम्हारे आने से,
मेरी जीवन बगिया से तुम कभी गमन न करना।
सदा रहे बसंत खुशहाली मेरे जीवन- आँगन में,
चहुं ओर बसंत वयार छाया है।
संग अपने बसंत पंचमी का पर्व लाया है,
मां शारदा का उदय दिवस आया है।
सारे देश में हरियाली लाया है,
बसंत पंचमी के पुनीत दिवस पर सबका मन लुभाया है।
मां शारदा की पूजा-अर्चना कर,
मां शारदा से शुभ आशीष पाया है।

