
ज्योतिषाचार्य पंडित राज शर्मा ने बताया कब से शुरू होगी गुप्त नवरात्रि?
*तारीख और घट स्थापना का शुभ मुहूर्त-
हरि न्यूज
हरिद्वार।हिंदू धर्म में शक्ति की साधना के लिए माघ मास की गुप्त नवरात्रि का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है.गुप्त नवरात्रि में किन देवियों की पूजा होती है? शक्ति का यह महापर्व कब शुरू होगा? घट स्थापना का शुभ समय क्या होगा? गुप्त नवरात्रि की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व –
पंडित राज शर्मा ने बताया कि इस बार गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी 2026 सोमबार से प्रारम्भ होकर 27 जनवरी 2026 मंगलवार को समाप्त होगी।

सनातन परंपरा में शक्ति की साधना का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. जिस शक्ति के बगैर शिव और दूसरे देवता अधूरे माने जाते हैं, उसकी पूजा के लिए हर साल चार बार नवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है. इसमें से दो नवरात्रि – चैत्र और शारदीय पर जहां शक्ति की साधना-आराधना खूब धूम-धाम से की जाती है तो वहीं दो नवरात्रि – माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रि पर में माता के दिव्य स्वरूप की पूजा गुप्त रूप से की जाती है. माघ मास की नवरात्रि का महापर्व कब प्रारंभ होगा? देवी पूजा के लिए कब घट स्थापना होगी? आइए माघ मास की गुप्त नवरात्रि से जुड़ी सभी बातों को विस्तार से जानते हैं.
माघ गुप्त नवरात्रि कब है –
माघ महीने की गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी 2026, सोमवार से प्रारंभ होगी और 27 जनवरी 2026 को समाप्त होगी.
गुप्त नवरात्रि शुभ मुहूर्त –
नवरात्रि प्रारम्भ : 19 जनवरी 2026, सोमवार
नवरात्रि समाप्त : 27 जनवरी 2026, मंगलवार
घट स्थापना का शुभ मुहूर्त: 19 जनवरी 2026, सोमवार को प्रात:काल 06:43 से 10:24 बजे तक
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त: 19 जनवरी 2026, सोमवार को प्रात:काल 11:52 से लेकर दोपहर 12:36 बजे तक
गुप्त नवरात्रि में 9 नहीं 10 देवियों की होती है पूजा
चैत्र और शारदीय नवरात्रि के 09 दिनों में जहां प्रत्येक दिन एक देवी की पूजा के लिए समर्पित होता है और कुल 09 देवियों – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा होती है, तो वहीं माघ और आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या – काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की गुप्त रूप से साधना-आराधना की जाती है. माघ मास की गुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन बसंत पंचमी का महापर्व भी मनाया जाता है, जिसमें माता सरस्वती की भी विशेष पूजा की जाती है ।
गुप्त नवरात्रि का धार्मिक महत्व
10 महाविद्या की साधना से जुड़ा गुप्त नवरात्रि का पर्व साल में दो बार ऋतुओं के संधिकाल के दौरान आता है. आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का पर्व जहां ग्रीष्म ऋतु के समाप्ति के बाद वर्षा की शुरुआत के दौरान मनाया जाता है तो वहीं माघ मास की गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व शीत ऋतु के बाद बसंत ऋतु के आगमन के दौरान मनाया जाता है. गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व तंत्र, मंत्र और यंत्र को सिद्ध करने के लिए अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना जाता है. यही कारण है कि लोग अपनी कामनाओं को पूरा करने के लिए देवी 10 अलग-अलग स्वरूपों की विशेष पूजा करते हैं. मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में जितने गुप्त रूप से देवी की साधना की जाती है, वह उतनी ही ज्यादा सफल होती है ।
– ज्योतिषाचार्य पंडित राज शर्मा
