
भगवानदास शर्मा प्रशांत
शिक्षक सह साहित्यकार
इटावा उत्तर प्रदेश
जिनके शब्द शस्त्र शास्त्र जैसे,
जो विश्व शांति की मिसाल थे।
संसद के शिखर पर गूँज उठती,
वाकपटु,राष्ट्र सेवा में कमाल थे।
इक कवि की कोमल कल्पना में,
दृढ़ इच्छा का तेज समाया था।
हिय में भावना सदा राष्ट्र प्रथम,
मानवता का दीप जलाया था।
शून्य से शिखर तक का सफर,
चढ़ अडिग भारत पहचान बने।
पोखरण में परमाणु गर्जना कर,
आत्म रक्षा सम्मान हुंकार बने।
राजनीति में सत्य, शुचिता का,
अटल जी उदाहरण बन गये थे।
वह विपक्ष में रहकर भी सत्य,
धर्म का पथ न छोड़ सके थे।।
“जय जवान,जय किसान” संग,
विकास मंत्र “जय विज्ञान” था।
कवि-हृदय में राष्ट्र प्रेम बसाया,
नव नेतृत्व में अटल महान था।।
भारत रत्न श्री अटल भारत की,
साफ राजनीति की पहचान बने,
युग-युग में “अटल” नाम रहेगा,
अटल भारत माँ की शान बने।।
