
श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े की पवित्र छड़ी यात्रा का गंगोत्री धाम में भव्य स्वागत, संतों ने किया माँ गंगा का विधिवत पूजन-अर्चन
भटवाड़ी स्थित पायलट बाबा आश्रम में विधिवत पूजन के पश्चात गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुई पवित्र छड़ी यात्रा
महामंडलेश्वर स्वामी वीरेंद्रानंद गिरि महाराज के नेतृत्व में संतों ने माँ गंगा से की विश्व शांति, युद्ध विराम, मानव कल्याण एवं राष्ट्र की सुख-समृद्धि की प्रार्थना
पवित्र छड़ी यात्रा सनातन धर्म, प्राचीन तीर्थ परंपराओं, आध्यात्मिक चेतना एवं विश्व शांति का पावन संदेश देती है : श्रीमहन्त नारायण गिरि महाराज
हरि न्यूज
हरिद्वार/ उत्तरकाशी।श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े की ऐतिहासिक एवं पवित्र छड़ी यात्रा आज उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद स्थित भटवाड़ी के पायलट बाबा आश्रम में विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात पावन गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुई। इस अवसर पर प्रशासन की ओर से इंस्पेक्टर श्री सतपाल सिंह तथा जूना अखाड़े की चारों मढ़ियों के संत-महात्माओं की विशेष उपस्थिति रही।
पवित्र छड़ी यात्रा के गंगोत्री धाम पहुँचने पर पवित्र छड़ी का धार्मिक परंपराओं के अनुसार भव्य स्वागत एवं पूजन किया गया। यात्रा में सम्मिलित साधु-संतों का भी श्रद्धापूर्वक स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। संपूर्ण वातावरण माँ गंगा के जयकारों, हर-हर महादेव एवं सनातन धर्म के उद्घोष से भक्तिमय हो उठा।

इस पवित्र छड़ी यात्रा के प्रमुख सेवक एवं श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी वीरेंद्रानंद गिरि महाराज के साथ छड़ी महंत श्री पुष्कर राज गिरि, महंत श्री पशुपति गिरि, महंत श्री रुद्रनाथ गिरि, महंत श्री आकाश गिरि एवं महंत श्री अमृतानंद गिरि सहित अनेक संत-महात्माओं ने गंगोत्री धाम में माँ गंगा का विधिवत पूजन-अर्चन किया।
इस अवसर पर सभी संतों ने माँ गंगा से भारतवर्ष की सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली, राष्ट्रीय एकता एवं समस्त देशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना की। साथ ही विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे युद्धों और संघर्षों की समाप्ति, विश्व शांति की स्थापना, मानवता की रक्षा तथा संपूर्ण विश्व के कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना की।

श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता, सिद्धपीठ श्री दूधेश्वरनाथ महादेव मठ मंदिर, गाजियाबाद के पीठाधीश्वर, दिल्ली संत महामंडल एवं जूना अखाड़ा 13 मढ़ी के अध्यक्ष तथा विश्व शांति संगठन (World Peace Organisation) के अंतरराष्ट्रीय संगठन महामंत्री श्रीमहन्त नारायण गिरि महाराज ने पवित्र छड़ी यात्रा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि सनातन धर्म की प्राचीन ऋषि-मुनि परंपरा, भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक एकता और विश्व कल्याण की भावना का जीवंत प्रतीक है।
श्रीमहन्त नारायण गिरि महाराज ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के चारों धामों एवं प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा के माध्यम से पवित्र छड़ी सनातन धर्म की गौरवशाली परंपराओं को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य कर रही है। यह यात्रा समाज में धार्मिक जागरूकता, आपसी सद्भाव, आध्यात्मिक चेतना और मानवता के प्रति सेवा भावना को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

महाराज श्री ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व के अनेक देशों में युद्ध, अशांति एवं संघर्ष की परिस्थितियाँ बनी हुई हैं। ऐसे समय में संत समाज का दायित्व है कि वह विश्व शांति, अहिंसा, करुणा, प्रेम और मानव कल्याण का संदेश संपूर्ण विश्व तक पहुँचाए।
उन्होंने कहा कि माँ गंगा भारतीय संस्कृति, सनातन आस्था और आध्यात्मिक पवित्रता की प्रतीक हैं। माँ गंगा की कृपा से संपूर्ण विश्व में शांति स्थापित हो, युद्ध समाप्त हों, सभी राष्ट्रों में सद्भावना बढ़े और समस्त मानवता का कल्याण हो, यही संत समाज की सामूहिक प्रार्थना है।
श्रीमहन्त नारायण गिरि महाराज ने पवित्र छड़ी यात्रा में सम्मिलित समस्त संत-महात्माओं, यात्रा के प्रमुख सेवक महामंडलेश्वर स्वामी वीरेंद्रानंद गिरि महाराज, सभी छड़ी महंतों, स्थानीय प्रशासन एवं सहयोगियों के प्रति मंगलभाव व्यक्त करते हुए यात्रा की सफलता की कामना की।

आज सुबह यात्रा भटवाड़ी से गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुई।
पवित्र छड़ी यात्रा के प्रमुख महंत हिमालय पीठाधीश्वर श्री महंत वीरेंद्र आनंद गिरि महाराज ने बताया यह पवित्र छड़ी अपने प्रथम चरण में यमुनोत्री गंगोत्री के दर्शनों के पश्चात बद्रीनाथ धाम केदारनाथ धाम तुंगनाथ धाम त्रिजुगेनारायण अनुसूया मंडल अखी मठ होते हुए करण प्रयाग पहुंचेगी इसके अतिरिक्त यह पवित्र छड़ी ऐसे पौराणिक मंदिरों के भी दर्शन करेगी जिन्हें अपेक्षाकृत श्रद्धालुओं को जानकारी नहीं है इस यात्रा का उद्देश्य ऐसे पौराणिक मंदिरों का भी प्रचार प्रसार कर श्रद्धालुओं को उनके दर्शनों के लिए आने के लिए प्रेरित करना है।
संत समाज के अनुसार यह पवित्र छड़ी यात्रा चारधाम सहित उत्तराखंड के सभी प्रमुख तीर्थों का भ्रमण करेगी। यात्रा का उद्देश्य सनातन संस्कृति का प्रचार और विश्व कल्याण की कामना है।



