
हरि न्यूज/प्रमोद गिरि
नजीबाबाद।उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद की 17 नजीबाबाद विधानसभा सीट पर आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्षेत्र के राजनीतिक जानकारों और कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि भारतीय जनता पार्टी इस सीट पर लंबे समय से चला आ रहा जीत का सूखा समाप्त करना चाहती है तो इस बार भाजपा को जातीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए एक साफ़-सुथरी छवि वाले स्थानीय दलित नेता पर दांव लगाना चाहिए।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा ने वर्ष 1992 में साधारण परिवार और स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवार स्वर्गीय राजेंद्र सिंह को टिकट दिया था, जिसके परिणामस्वरूप भाजपा ने इस सीट पर अपनी एकमात्र जीत दर्ज की थी। उसके बाद पार्टी ने सभी चुनावों में वैश्य और जाट समाज के प्रभावशाली नेताओं को उम्मीदवार बनाया, परन्तु सफलता हाथ नहीं लगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नजीबाबाद मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम,जाट और दलित मतदाता चुनाव परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में केवल पारंपरिक समीकरणों के भरोसे चुनाव जीतना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।
चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि वैश्य समाज में राजीव अग्रवाल और जाट समाज में कुंवर भारतेंद्र सिंह जैसे मजबूत नेताओं के बावजूद भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। ऐसे में पार्टी के सामने तीसरा और प्रभावी विकल्प एक ऐसे स्थानीय दलित चेहरे को सामने लाने का हो सकता है, जिसकी ईमानदार छवि हो, समाज में मजबूत पकड़ हो और जो बहुजन समाज पार्टी तथा आज़ाद समाज पार्टी के परंपरागत मतदाताओं के एक वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता रखता हो।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भाजपा सामाजिक समीकरणों के अनुरूप मजबूत,स्वच्छ छवि वाले और स्थानीय दलित उम्मीदवार को मैदान में उतारती है तो नजीबाबाद विधानसभा सीट पर उसकी जीत की संभावना पहले की तुलना में काफी मजबूत हो सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व की चुनावी रणनीति और उम्मीदवार चयन पर निर्भर करेगा।
