
हरि न्यूज
मुंबई।सोमवार की सायं मुंबई का साहित्यिक परिवेश उस समय विशेष रूप से जीवंत हो उठा, जब दिल्ली के वरिष्ठ गीतकार डॉ. ओंकार त्रिपाठी के सम्मान में एक विशेष साहित्यिक संध्या का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम काव्यसृजन और अखिल भारतीय काव्य मंच, मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम हॉल, सांताक्रूज़ (पूर्व) में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार हौंसिला प्रसाद अन्वेषी ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर का साहित्यिक मंच है, जहाँ कविता और विचार के माध्यम से समाज और राष्ट्र के प्रश्नों पर संवाद संभव होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से हिंदी साहित्य की अखिल भारतीय पहचान और सुदृढ़ होती है।
मुख्य अतिथि डॉ. ओंकार त्रिपाठी ने कहा कि साहित्य का मूल उद्देश्य मनुष्य को संवेदनशील बनाना है। उन्होंने कहा कि गीत और कविता समाज के भीतर छिपी पीड़ा, संघर्ष और आशा को स्वर देती हैं। उन्होंने युवा रचनाकारों से आग्रह किया कि वे समय की चुनौतियों से आँख मिलाकर लिखें।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ. दयानंद तिवारी ने कवि और कविता के दायित्व पर विचार रखते हुए कहा कि कविता केवल व्यक्तिगत भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय उत्तरदायित्व का बोध कराती है। उन्होंने कहा कि कवि का लेखन राष्ट्र, समाज और संविधानिक मूल्यों से जुड़ा होना चाहिए, तभी कविता स्थायी प्रभाव छोड़ती है।
कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर अंजनी कुमार द्विवेदी ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि डॉ. त्रिपाठी का सम्मान हिंदी गीत परंपरा के प्रति सम्मान है। समारोह में उपस्थित साहित्यकारों ने डॉ. त्रिपाठी के रचनात्मक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला और उनके साहित्य को विचारोत्तेजक बताया।
समारोह में मुंबई महानगर के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों एवं रचनाकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से निडर जौनपुरी, श्रीधर मिश्र आत्मिक, मुरलीधर पाण्डेय, मदन गोपाल गुप्ता, आनंद पांडेय ‘केवल’, लाल बहादुर यादव, अर्चना झा, लक्ष्मी यादव, विनय अंधवाल, डॉ. कुसुम तिवारी, रामजी कनौजिया, त्रिलोचन सिंह अरोड़ा तथा रवि यादव उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश–बिहार महासंघ, दिल्ली के अध्यक्ष काशी प्रसाद तिवारी, सुनील कुमार शर्मा एवं शारदा प्रसाद शर्मा की उल्लेखनीय उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। उपस्थित साहित्यकारों ने एक स्वर में डॉ. ओंकार त्रिपाठी के साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए उनके गीतों को समकालीन सामाजिक चेतना का सशक्त स्वर बताया।
कार्यक्रम का संचालन कवि ओम प्रकाश तिवारी ने कुशलता से किया। यह संध्या साहित्यिक एकता, वैचारिक संवाद और राष्ट्रीय चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति बनकर स्मरणीय रही।
