
हरि न्यूज
हरिद्वार।महर्षि दयानन्द ऋषि बोधोत्सव पर्व स्वामी श्रद्धानंद जयन्ती के उपलक्ष्य में यज्ञ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुरुकुल के छात्रों ने ऋषि दयानन्द स्वामी श्रद्धानंद के जीवन पर्व पर अपने विचार प्रस्तुत किये। ब्रह्मचारियों ने स्वामी श्रद्धानंद को स्वामी दयानन्द का सच्चा गुरुभक्त शिष्य बताया तथा कहा कि उन्होंने अपने गुरु की आज्ञा पालनार्थ स्वयं के जीवन एवं परिवार को श्रद्धा की बलिदानी पर समर्पित कर दिया। श्रद्धानंद के जीवन से प्रेरणा पाकर अनेक क्रांतिकारी देश भक्तों ने बलिदान की बेडी को अपने लहू से लाल कर दिया।
गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय में महर्षि दयानन्द ऋषि बोधोत्सव पर्व स्वामी श्रद्धानंद जयन्ती के उपलक्ष्य में प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता का तीन वर्गों- प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चत्तर माध्यमिक वर्गों में आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के संयोजक अशोक आर्य एवं अश्विनी कुमार ने बताया कि प्रतियोगिता के प्रथम राऊण्ड में लगभग 40 तथा फाईनल राऊण्ड में लगभग 20 प्रतिभागियों ने भाग लेकर ऋषि दयानन्द एवं स्वामी श्रद्धानंद के जीवन चरित्र को अपनी प्रतिभा से अत्यन्त रोचक ढंग से प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर गुरुकुल के मुख्याधिष्ठाता डा0 दीनानाथ शर्मा ने महर्षि दयानन्द एवं स्वामी श्रद्धानंद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें प्रथम देशभक्त के रुप मे परिलक्षित किया। गुरुकुल के प्रधानाचार्य डा0 विजेन्द्र शास्त्री ने इस अवसर पर महर्षि दयानन्द के पर्व को देश के परिवर्तन की एक क्रांतिकारी घटना बताया। उन्होने कहा की यदि यह महाशिवरात्री न आती तो आज देश का भविष्य कुछ और होता उन्होने स्वामी श्रद्धानंद को महर्षि दयानन्द का समर्पित शिष्य बताया। उन्होंने गुरुकुल की स्थापना पर अंग्रेज सरकार के सामने एक नूतन चुनौती प्रस्तुत की।
इस अवसर पर कार्यक्रम के सह संयोजक वेदपाल सिंह एवं डाॅ॰ ब्रजेश कुमार ने कार्यक्रम की रूपरेखा और व्यवस्था में सहयोग किया। लोकेश शास्त्री पी.टी.आई. ने भी भजन प्रस्तुत किये। इस अवसर पर कार्यक्रम में विद्यालय-विभाग के प्रार्थना स्थल पर जितेन्द्र कुमार वर्मा, डाॅ0 योगेश शास्त्री, डाॅ0 हुकम चंद, अमर सिंह, अशोक कुमार, अमित कुमार, राजकमल, दीपकमल, विजय कुमार, धर्म सिंह, गौरव शर्मा, रविकांत मलिक, तुषार सिंह, धीरज कौशिक, मामराज पाल, भास्कर पाण्डे, धर्मेन्द्र आर्य, समस्त अधिष्ठातागण, समस्त कर्मचारीगण एवं समस्त ब्रह्मचारीगण उपस्थित रहे।
