
हरि न्यूज
मातृ -पितृ दिवस
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मां की ममता को सब जाने,
पिता की आह कोई न जाने,
पढ़ा लिखा कर काबिल बनाया,
अपने पांवों पर खड़ा कराया
वो माता-पिता है,
वो माता-पिता है, वो माता- पिता हैं।
अपने कंधे पर वह हमें बै ठाते,
सारे मोहल्ले की सैर कराते, गुदगुदी मचाकर हमें हँसते,
मीठी-मीठी गोली खिलाते, वो माता-पिता हैं, वो माता-पिता हैं, वो माता-पिता हैं।
हमारे नित्य सपने सजाते, अपने दर्द कभी नहीं बतलाते,
हमें जरा सर्दी हो जाती, तुरंत वैद्य को दिखलाते
वो माता- पिता है, वो माता- पिता है, वो माता- पिता है।
ठोकर जरा हमें लग जाती, तुरंत सीने से हमें लगाते।आंसू -नाक पोंछते बहते गालों से,
गुदगुदी मचाकर हमें हंसते l वो माता -पिता हैं, वो माता -पिता हैं, वो माता- पिता हैं।
अब उनकी बातें माने कौन, अब रहते हैं वह सदा मौन, दर्द सीने में उठता जाने कौन,
खाट पर पड़े वह रोते हैं मौन,
वो माता -पिता हैं, वो माता -पिता हैं,वो माता -पिता हैं।
माता-पिता हमारे जन्मदाता,
हम उनके चरणों की धूल माथा टेकें नित्य उनके चरणों में,
कभी न करना भूल-चूक।
नए-नए वस्त्र लाकर हमको पहनाते
स्वयं रहते फटेहाल
हमारी खुशी के लिए
स्वयं की खुशी भूल जाते।
वो माता -पिता हैं, वो माता -पिता हैं, वो माता-पिता हैं ।

अब्दुल सलाम कुरेशी
जिला- गुना (म.प्र.)
